सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। इस मामले में वन विभाग बेहतर संरक्षण का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपा रहा है लेकिन दूसरी ओर रणथम्भौर में अब उम्रदराज बाघ बाघिनों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। रणथम्भौर में वर्तमान में दस से अधिक बाघ बाघिन ऐसे हैं जो उम्र के आखिर पड़ाव पर पहुंच चुके हैं। इन बाघों को रणथम्भौर में युवा होते बाघ बाघिनों से भी लगातार चुनौती मिल रही है। इलाके को लेकर बाघों के बीच संघर्ष हो रहा है और ऐसे में युवा बाघ बाघिन उम्रदराज बाघ बाघिनों पर भारी पड़ रहे है और युवा बाघ बाघिन उम्रदराज बाघ बाघिनों को खदेड़कर उनके इलाके पर अपना कब्जा जमा रहे हैं। ऐसे में रणथम्भौर के उम्रदराज बाघ बाघिन टेरेटरी की तलाश में दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर है।
ये बाघ बाघिन हैं उम्र के आखिरी पड़ाव पर
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रणथम्भौर में वर्तमान में बाघ टी-3, बाघ टी-38, टी-47 यानि मोहन , बाघिन टी-48, बाघिन टी-13, टी-41, टी-19 यानि कृष्णा, बाघिन टी-39 यानि नूर, टी-8 यानि लाडली आदि शामिल है।
पार कर चुके 15 साल की उम्र
रणथम्भौर के ये सभी बाघ बाघिन 15 साल की आयु को पार कर चुके हैं। बाघिन टी-13 की उम्र करीब 18 साल, टी-8 की उम्र करीब 18 साल, टी39 की उम्र करीब 15 साल, टी-41 की उम्र 14 साल, टी-48 की उम्र 15 साल, टी-38, टी-47 की उम्र भी 14 साल के पार हो चुकी है।
15 साल मानी जाती है बाघों की उम्र
वन अधिकारियों की माने तो आम तौर पर एक बाघ की औसत उम्र करीब 15-16 साल के आसपास ही मानी जाती है। ऐसे में रणथम्भौर में वर्तमान में बूढ़े बाघ बाघिनों की संख्या अधिक है। हालांकि युवा बाघ-बाघिनों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है।
सबसे अधिक जिवित रही थी मछली
यूं तो बाघ-बाघिन की उम्र करीब 15 साल के आसपास ही मानी जाती है। लेकिन सबसे अधिक सालों तक जिवित रहने का रिकॉर्ड भी रणथम्भौर की बाघिन के ही नाम पर है। रणथम्भौर की प्रसिद्ध बाघिन मछली यानि टी-16 करीब 20 साल तक जिवित रही थी। इसी की राह पर अब बाघिन टी-8 व टी-13 चल रही है। इनकी उम्र्र भी 18 साल से अधिक हो चुकी है।
इनका कहना है…
रणथम्भौर में उम्रदराज बाघ बाघिन की संख्या काफी अधिक है। यहां करीब दस से अधिक बाघ बाघिन 15 साल की उम्र को पार कर चुके हैं। ये सभी उम्र के आखिरी पड़ाव पर है।
– अरविंद कुमार झा,एसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।