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दर्दे-ए-यातायात: सड़क पर दुकान तो कहां निकले वाहन

नगरपरिषद द्वारा कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाती है। इस कारण दुकानदारों में भी कोई भय नहीं है। बाजारों में दुकान से ज्यादा सामान सड़क पर रखा नजर आता है।

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Rakesh Verma

May 15, 2017

सवाईमाधोपुर. शहर के बाजारों में आधी सड़क को दुकानदारों ने घेर रखा है। ऐसे में सड़कों पर वाहनों को निकलने के लिए जगह कम होती जा रही है। यह स्थिति भी यातयात के लिए सिरदर्द बनी हुई है। नगरपरिषद द्वारा कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाती है। इस कारण दुकानदारों में भी कोई भय नहीं है।

जिला मुख्यालय पर बाजारों में दुकान से ज्यादा सामान सड़क पर रखा नजर आता है। अपने फायदे के लिए फुटपाथ छोड़ दुकानदारों ने सड़क तक कब्जा कर लिया है। इसके आगे लोगों के वाहन खड़े हो जाते हैं। ऐसे में सड़क पर चलने वाले वाहनों को जगह कहां मिल पाती है। लिहाजा जाम के हालात बनते हैं और जिसमें लोग परेशान होते हैं।

8-10 फीट तक कब्जा

अधिकांश जगह दुकानदारों ने काउन्टर ही फुटपाथ पर रखा हुआ है। इसके बाद वे दुकान का सामान रखना शुरू करते हैं। दुकान के बाहर 8-10 फीट तक सामान रखा हुआ है। सबसे ज्यादा बुरे हालात प्रेम मंदिर रोड पर हैं। इस पर दुकानदारों ने कूलर, पंखे, टंकियां और अन्य सामान रखा हुआ है। इसके अलावा स्टेशन सर्किल से टोंक बस स्टैण्ड, पुरानी ट्रक यूनियन से स्टेशन सर्किल, कलक्टे्रट रोड पर कमोवेश यही हालात हैं। शहर अन्दर के बाजारों में भी हालात जुदा नहीं हैं।

कार्रवाई हुई पर नतीजा ढाक के तीन पात

नगरपरिषद द्वारा दुकानों के बाहर हो रहे अस्थायी अतिक्रमण को हटाने के लिए कार्रवाई की गई। लेकिन यह कार्रवाई महज खानापूर्ति तक ही सीमित रही। कार्रवाई के नाम पर एक-दो स्थानों से सामान जब्त कर लिया। एक-दो दिन बाद कार्रवाई बंद कर दी गई। दोबारा परिषद की ओर से मॉनीटरिंग ही नहीं की गई कि उस जगह हालात कैसे हैं। इसी का परिणाम है कि दुकानदारों में कार्रवाई को लेकर किसी तरह का भय नहीं है।

फिर से लगा लेते...

दुकानों के बाहर रखा सामान अस्थायी अतिक्रमण है जिसके खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। सामान जब्त करने के साथ चालान भी किया जाता है। इसके बावजूद दुकानदार नहीं मानते और दोबारा कब्जा कर लेते हैं। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है कि उनके कारण दूसरे लोगों को परेशानी होती है।

सौरभ जिंदल, आयुक्त नगरपरिषद सवाईमाधोपुर।