
‘वारिस’ के रूप में पहचानी जाएं बेटियां
गंगापुरसिटी . महिला के रूप में मां-बेटी, बहन और बहू ने ही पुरुष को काबिल और सशक्त बनाया है। बेटियों ने अपनी काबिलियत के झंडे चांद तक गाढ़े हैं। ऐसे में नारी शक्ति सच्चे सम्मान की हकदार है। विरासत संभालने की बात जब भी आए ‘वारिस’ के रूप में बेटा के साथ बेटी का नाम भी समाज में पूरे हक के साथ लिया जाना चाहिए। तब ही सच्चे मायनों में महिला सशक्तीकरण होगा। यह कहना है बीस भाषाओं में गाने के साथ बैली डांस कर वल्र्ड रिकॉर्ड बनाकर ‘वल्र्ड बुक ऑफ लंदन’ में नाम दर्ज कराने वाली डॉ. माधुरी शर्मा का।
महिला दिवस पर ‘पत्रिका’ से बातचीत में शर्मा ने कहा कि कानून ने बेटा-बेटी को समान दर्जा दिया है, लेकिन पुरुष प्रधान समाज में इसकी पुख्ता पालना नहीं हो रही। इस रुढि़वादी परंपरा को तोडऩे के लिए बेटियों को खुद आगे आकर विरासत संभालनी होगी। उन्होंने कहा कि घूंघट की ओट से निकलकर बहू और बेटियों ने राजनीति और विभिन्न पदों पर आसीन होकर कमान अपने हाथों में ली है।
यह नारी के लिए सुखद संकेत हैं। महिलाओं को शिक्षा को अपना हथियार बनाना होगा। इसके बलबूते ही वह इन बेडिय़ों को तोडऩे में कामयाब होंगी। हालांकि अच्छी शिक्षा के प्रति महिलाएं जागरुक हुई हैं। चौका-चूल्हा कराने जैसी मानसिकता से महिलाओं का भला नहीं होगा। हम सबको महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए आगे आकर पहल करनी होगी। माधुरी शर्मा ने कहा कि बेटियां अपने मन का करें और खुद को साबित करें। इसके बाद समाज की रूढि़वादिता की बेडिय़ां स्वत: ही टूट जाएंगी।
Published on:
08 Mar 2019 08:39 pm
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