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कोई चुरा ना ले जाए: पानी भरकर टंकी के लगा देते हैं ताला , उदेईकला में जेवरात से ज्यादा पानी की सुरक्षा

क्षेत्र में गहरा रहा है जलसंकटनहीं सुनते अधिकारी व जनप्रतिनिधि

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गंगापुरसिटी उदेईकलां में सड़क पर रखी पानी की टंकी।

जीतेन्द्र सिंह तंवर
गंगापुरसिटी. अब तक आपने सुना होगा कि लोग सोने-चांदी के गहने व अन्य कीमती वस्तुओं को ताले में बंदकर रखते हैं, लेकिन गंगापुरसिटी के पास उदेईकलां गांव ऐसा है जहां कोई चुरा ना ले जाए इसके लिए टंकियों में पानी भरकर उनके ताला लगा दिया जाता है। दरअसल में गर्मी की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र के लोगों को जलसंकट सताने लगा है। खासकर उदेईकलां गांव के लोग ज्यादा परेशान हैं। समस्या का कारण जलदाय विभाग की अनदेखी है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की आपूर्ति के लिए जलदाय विभाग की ओर से नल कनेक्शन किए हुए हैं, लेकिन जलापूर्ति तीन या चार दिनों में एक बार होती है। वह भी अधिकतम दस मिनट के लिए। ज्यादातर समय दूषित पानी की सप्लाई होती है। महिलाओं को पीने और घरेलू कामकाज के लिए दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। लोगों ने बताया कि नलों के आने का भी समय निर्धारित नहीं है।

'भाभी जल्दी कर, बर्तन लेकर आ'
जलापूर्ति के समय नलों पर महिलाओं की भीड़ लग जाती है। आपाधापी ऐसी कि कोई जैसे बरसों पुराने बिछड़े से मिलने को उतावला रहता है। गांव में चहुं ओर शोर ही शोर सुनाई देता है। 'चाची आजा पानी आ गया', 'भाभी जल्दी कर, बर्तन लेकर आ'। कुछ ऐसी ही आवाजें सुनाई देती है। किल्लत से बचने के लिए लोग घरों से पानी की टंकियां लाकर सड़क पर ही रख देते हैं। फिर शुरू होता है इनको जल्दी-जल्दी भरने का क्रम। घर में काम आने वाला पानी ले जाने के बचा बचा पानी टंकी में छोड़कर इसका ढक्कन बंदकर ताला लगा दिया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकतर लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। पानी की किल्लत होने के बाद भी वे टैंकर से महंगी दर का पानी नहीं खरीद सकते। इससे जलापूर्ति से ही उनके जीवन की डोर बंधी है। एकाध परिवार सम्पन्न हैं। वे टैंकर से पानी खरीद लेते हैं। हालांकि वे पानी को ताले में बंदकर रखते हैं, लेकिन किसी को ज्यादा जरूरत होने पर वे ताले खोल भी लेते हैं।

नहीं हो रही सुनवाई
लोगों ने बताया कि पानी की समस्या से निजात पाने के लिए आला अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से कई बार शिकायत की, लेकिन आश्वासन ही मिले हैं। किसी ने भी समस्या के निराकरण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। गत दिनों भी उपजिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। जल समस्या के समाधान तथा उदेईकलां गांव की ओर आने वाली पाइप लाइन से अवैध कनेक्शन हटवाने की मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

45 लाख लीटर का उत्पादन
विभागीय सूत्रों के अनुसार शहरी जल योजना के अधीन करीब एक लाख 26 हजार की आबादी है। प्रति व्यक्ति सौ लीटर पानी के तय मापदण्ड के अनुसार एक करोड़ 26 लाख लीटर पानी की आवश्यकता होती है। वर्तमान में विभाग 48 नलकूपों से महज 45 लाख लीटर जल उत्पादन कर पा रहा है। पूर्व में विभाग की ओर से 48 लाख लीटर का उत्पादन किया जा रहा था, लेकिन इस वर्ष बारिश की कमी से जल उत्पादन 3 लाख लीटर घटकर 45 लाख लीटर ही रह गया है।

पांच नए नलकूप से मिलेगा सहारा
जलाापूर्ति में परेशानी झेल रहे विभाग को पांच नए नलकूप स्वीकृत होने से थोड़ी राहत मिलेगी। नलकूप स्थापित करने पर करीब 81 लाख रुपए की लागत आएगी। इसके तहत नलकूप, पाइप लाइन व नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का कार्य कराया जाएगा। विभाग का मानना है कि नए नलकूप चालू होने से 4 से 5 लाख लीटर पानी का उत्पादन बढ़ेगा। इससे पेयजल समस्या में थोड़ी कमी आएगी।

नए कनेक्शनों पर रोक
पानी के कम उत्पादन के कारण विभाग की ओर से गत गुरुवार से नए कनेक्शनों पर भी रोक लगा दी गई है। कनेक्शनों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट भी नहीं कराया जा सकेगा। विभाग का मानना है कि अंतिम छोर के उपभोक्ताओं तक पानी नहीं पहुंच पाता है। हालांकि गर्मी में हर वर्ष नए कनेक्शनों पर रोक लगाई जाती है, लेकिन इस बार कम बारिश व जल उत्पादन के कारण मार्च के शुरुआत में ही नए कनेक्शनों पर रोक लगा दी गई है।

उत्पादन में कमी है
इस वर्ष बारिश कम होने से जल उत्पादन में 3 लाख लीटर की कमी आई है। जल उत्पादन बढ़ाने के लिए पांच नए नलकूप स्थापित किए जाएंगे। इससे व्यवस्था में सुधार होगा।
-प्रदीप मीना, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग गंगापुरसिटी

इनका कहना है...
पानी की सप्लाई नियमित रूप से हो रही है। अवैध कनेक्शनों की जांच कराई जाएगी।
सतीश अग्रवाल, सहायक अभियंता, पीएचईडी गंगापुरसिटी ग्रामीण।

ये बोले लोग
गांव में पिछले कई सालों से पेयजल की समस्या का बनी हुई है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों ही उदासीनता दिखा रहे हैं।
मुक्तदिर अहमद, समाजसेवी

लोग पीने के पानी के लिए भटक रहे हैं। महिलाओं को पानी के लिए दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पेयजल समस्या का समाधान हो तो बात बने।
मोहम्मद आतिफ, उदेईकला

नलों में पानी दो या तीन दिन में एक बार ही आता है। पीने के पानी के लिए दूर कुएं पर जाना पड़ता है। दूर से पानी लाने में काफी समय भी खर्च हो जाता है।
रेखा, उदेईकला

कई सालों से पानी की समस्या के निराकरण की मांग कर हैं। घरेलू और सामाजिक कार्यों के लिए महंगी दर पर टैंकर मंगाना मजबूरी है।
रामअवतार शर्मा, उदेईकला

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