सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर के खूंखार बाघ टी-104 की भी जल्द ही रणथम्भौर से विदाई हो सकती है। इसके लिए वन विभाग की ओर से तैयारी शुरू कर दी गई है। वहीं मुकुंदरा में भी बाघ के लिए पूर्व में तैयार किए गए एनक्लोजर में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि अब तक वन विभाग की ओर से इस संबंध में पुष्टि नहीं की जा रही है लेकिन सूत्रों की माने तो वन विभाग की ओर से विभागीय स्तर पर इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। संभवतया: इस माह के अंत तक बाघ टी-104 को रणथम्भौर के एनक्लोजर से मुकुंदरा शिफ्ट किया जा सकता है।
मुकुंदरा में भी एनक्लोजर में ही रखा जाएगा बाघ
बाघ टी-104 को भले ही रणथम्भौर से जल्द ही विदा करने की तैयारी की जा रही हो लेकिन बाघ को पूर्व में गठित की गई कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर खूंखार मानते हुए खुले में छोडऩे से मानव के लिए खतरा बताया जा चुका है ऐसे में अब बाघ को फिर से खुले जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा और बाघ को मुकुंदरा में भी एनक्लोजर मेंं रखा जाएगा।
इसलिए की जाएगी शिफ्टिंग
रणथम्भौर में वर्तमान में बाघों के लिए भिड़ में एक मात्र एनक्लोजर है। लेकिन वह पिछले तीन सालों से टी-104 के कारण भराहुआ है। रणथम्भौर का एनक्लोजर मात्र एक हेक्टयर का ही है। जबकि मुकुंदरा में पूर्व में तैयार किया गया एनक्लोजर 28 हेक्टयर का है। हालांकि इस एनक्लोजर को भी छोटा करने की तैयारी की जा रही है। जो लम्बे समय से खाली पड़ा है। रणथम्भौर का एनक्लोजर छोटा होने के कारण इसमें बाघ को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही भिड़ में एनक्लोजर के पास के इलाकों में कई अन्य बाघ बाघिनोंं का भी मूवमेंट रहता है। ऐसे में कई बार अन्य बाघ भी एनक्लोजर के समीप आ जाते हैं। ऐसे में बाघों के बीच टकराव की आशंका भी रहती है। अब वन विभाग की मंशा टी-104 को बड़े एनक्लोजर में शिफ्ट करने की है।
टी-136 को एमपी में किया जासकता है टे्रकुंलाइज
वहीं रणथम्भौर से एमपी गई बाघ टी-136 का मूवमेंट भी मुरैना, दतिया आदि के जंगलों में आबादी क्षेत्र के आसपास बताया जा रहा है। ऐसे में आवश्यकता पडऩे पर एमपी वन विभाग की टीम बाघ को टे्रकुंलाइज कर सकती है। ऐसे में रणथम्भौर से टी-104 की विदाई के बाद एनक्लोजर खाली होने पर बाघ टी-136 को भी वापस लाने पर विचार किया जा रहा है। यदि टी-136 को वापस लाया गया तो इसे कुछ दिनों के लिए भिड़ के एनक्लोजर में रखा जा सकता है हालांकि इस सबके लिए एनटीसीए की अनुमति आवश्यक है।
तीन लोगों की ले चुका जान
बाघ टी-104 अब तक तीन लोगों की जान ले चुका है। जुलाई 2019 में टी-104 ने पाडली गांव में शैच के लिए गई एक महिला की जान ली थी। इसके बाद अगस्तव सितम्बर में करौली में दो चरवाहोंं की जान ले ली थी। इसके बाद से ही वन विभाग की ओर से बाघ को एनक्लोजर मेंही रखा जा रहा है।
इनका कहना है…
बाघ टी-104 को मुकुंदरा के एनक्लोजर में शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है। रणथम्भौर का एनक्लोजर छोटा होने के कारणअब बाघ को मुकुं दरा के बड़े एनक्लोजर में रखने की योजना है। लेकिन शिफ्टिंग कब तक होगी अभी यह निश्चित नहीं है।
– शैलेन्द्र प्रताप सिंह, सीसीएफ, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, कोटा।