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रणथंभौर से सरिस्का तक गूंजेगी बाघों की दहाड़, धौलपुर तक जुड़ेगा जंगल

वन विभाग की ओर से प्रदेश का पहला वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर रणथम्भौर से सरिस्का तक तैयार किया जा रहा है। इसमें ही धौलपुर भी जुड़ जाएगा।

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सवाईमाधोपुर। वन विभाग की ओर से प्रदेश का पहला वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर रणथम्भौर से सरिस्का तक तैयार किया जा रहा है। इसमें ही धौलपुर भी जुड़ जाएगा। इससे बाघ-बाघिनों को सरिस्का में शिफ्ट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि बाघ-बाघिन स्वयं ही आसानी से रणथम्भौर से निकलकर धौलपुर के रास्ते सरिस्का पहुंच सकेंगे। वहीं सरिस्का से भी बाघ-बाघिन रणथम्भौर आ सकेंगे।

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उल्लेखनीय है कि रणथम्भौर के बाघ-बाघिनों ने अब तक कई बार सरिस्का को आबाद किया है। 2008 से अब तक कई बार रणथम्भौर से बाघ बाघिनों को सरिस्का शिफ्ट किया जा चुका है और 2005 में बाघ विहीन हो चुके सरिस्का में एक बार फिर से बाघों की दहाड़ सुनाई दे सकी थी। विभाग की ओर से करीब 140 किमी लंबे कॉरिडोर का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने मार्ग के बीच में आने वाली करीब 20 से अधिक ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया है। इन सभी ग्राम पंचायतों में वन क्षेत्र के समीप प्लाटेंशन का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस कॉरिडोर के निर्माण में करीब छह माह का समय लगेगा। यह कार्य वन विभाग की ओर से फ्रांस की एक कंपनी के सहयोग से कराया जा रहा है।

यह होगा लाभ
वन अधिकारियों ने बताया कि यदि यह वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर विकसित हो जाता है तो सरिस्का का जुड़ाव आसानी से धौलपुर के जंगलों तक हो जाएगा। जबकि पूर्व में कई बार रणथम्भौर से बाघ-बाघिन टेरेटरी की तलाश मेें करौली के कैलादेवी अभयारण्य होते हुए धौलपुर के जंगलों में पहुंच चुके हैं। ऐसे में कॉरिडोर के विकसित होने से रणथम्भौर के बाघ बाघिनों की एमपी के साथ-साथ राजस्थान के सरिस्का तक आसानी से आ जा सकेंगे। वहीं एमपी से बाघों के राजस्थान के जंगलों की ओर आने की संभावना भी बढ़ जाएगी। वहीं आने वाले समय में प्रदेश के बाघों को इनब्रीडिंग की समस्या से भी निजात मिल जाएगी। इस कॉरिडोर से भविष्य में वन विभाग की योजना सरिस्का को जयपुर के झालाना के लैपर्ड रिजर्व से भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा भरतपुर के घना पक्षी विहार व आसपास के वन क्षेत्र व जमावारामगढ़ के वन क्षेत्र को भी कॉरिडोर में शामिल किया जाएगा।

ऐसे जुड़ेगा रणथम्भौर
योजना के तहत सरिस्का से भरतपुर व धौलपुर व उसके आसपास के जंगलों तक कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा। जबकि रणथम्भौर से करौली होते हुए धौलपुर व एमपी के जंगलों तक पूर्व में ही प्राकृतिक कॉरिडोर है। ऐसे में यदि यह कोरिडोर विकसित हो जाता है और सरिस्का राजस्थान के धौलपुर व उसके आसपास के जंगलों से जुड़ जाता है तो फिर सरिस्का का जुड़ाव आसानी से रणथम्भौर से हो जाएगा।

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इनका कहना है
रणथम्भौर सहित प्रदेश भर में वन विभाग की ओर से टाइगर कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। ऐसे में फिलहाल सरिस्का को धौलपुर व रणथम्भौर से जोडऩे की कवायद की जा रही है।-मोहित गुप्ता, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।

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