सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर बाघ परियोजना में सीसीएफ की मनमानी इन दिनों टाइगर टे्रकिंग व मॉनिटरिंग पर भारी पड़ती नजर आ रही है। दरअसल पूर्व में रणथम्भौर के सीसीएफ ने सरकारी वाहनों का दुरोपयोग होने की आशंका का हवाला देकर वन अधिकारियों से अतिरिक्त सरकारी वाहनों को सीसीएफ ऑफि स में खड़ा करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद रणथम्भौर बाघ परियोजना के उपवन संरक्षक सहित अन्य क्षेत्रीय वन अधिकारियों ने उनके पास उपलब्ध अतिरिक्त सरकारी जिप्सियों को सीसीएफ ऑफिस में खड़ा कर दिया था। ये सभी वाहन आज भी सीसीएफ ऑफिस में ही है। ऐसे में अब रेंज स्तर पर केवल एक जिप्सी ही है। कई रेंज में तो एक भी जिप्सी नहीं हैं। वहां टे्रकिंग, गश्त व मॉनिटरिंग के लिए केवल सरकारी कैंपर का ही सहारा है। ऐसे में अब काम काज प्रभावित हो रहा है।
केवल कैंपर वो भी हो रहे खराब
रणथम्भौर की कई रेंज में तो टे्रकिंग व मॉनिटरिंग के लिए जिप्सी के अभाव में अब कैंपर का ही सहारा है। इनमें से भी कई कैंपर खराब होने के कारण महज शोपीस बने हुए हैं। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आरओपीटी में रेंज में दो सरकारी वाहन खराब है। ऐसे में यहां मॉनिटरिंग के लिए महज एक ही जिप्सी व कैंपर है। इसी प्रकार रणथम्भौर की दूसरी सबसे बड़ी रेंज में मॉनिटरिंग के लिए वन अधिकारियों के पास जिप्सी नहीं है। यहां भी दो कैंपर है जिनमें से भी एक खराब पड़ा है। वहीं कुण्डेरा रेंज में भी दो में से महज एक ही कैंपर चालू हालत में है। इसी प्रकार तालड़ा रेंज में तो पिछले कई दिनों से दोनों ही कैंपर खराब पड़े थे। हालांकि हाल ही में एक कैंपर की मरम्मत करा दी गई है। कुछ इस प्रकार के हालात फलौदी रेंज में भी बने हुए है। यहां भी वन विभाग के पास तीन सरकारी वाहन है। जिनमें से एक खराब है। इसके अलावा तीन बाइक भी खराब पड़ी है।
मरम्मत के लिए नहीं मिल रहा बजट
वन अधिकारियों ने बताया कि सीसीएफ की ओर से सरकारी वाहनों का पूल बनाने और सभी रेंज से अतिरिक्त सरकारी वाहनोंं को सीसीएफ कार्यालय में जमा करने के बाद रेंज स्तर पर टे्रकिंग व मॉनिटरिंग के लिए उपलब्ध सरकारी कैंपर व अन्य वाहनों के भी खराब होने के संबंध में अधिकारियों की ओर से सीसीएफ को कार्य में आ रही परेशानियों के बारे में सीसीएफ को अवगत कराकर बजट उपलब्ध कराने की मांग की थी लेकिन अब तक बजट नहीं मिल सका है।
सीसीएफ बोले यह मेरा विषय नहीं
जब इस संबंध में रणथम्भौर बाघ परियोजना के सीसीएफ से बात की तो उन्होंने बड़ा ही बेतुका से जवाब दिया और कहा कि सरकारी वाहनों की मरम्मत कराने का कार्य उनका नहीं है। यह काम उपवन संरक्षक का है।
इनका कहना है…
यह सही है कि कई सरकारी कैंपर व अन्य वाहर खराब हो रहे हैं। उनकी मरम्मत कराई जा रही है। कुछ ही मरम्मत हो चुकी है और शेष वाहनों की जल्द ही मरम्मत करा दी जाएगी।
– मोहित गुप्ता, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।