
गंगापुरसिटी. शहर के विकास और बेहतर सूरत के लिए 22 साल पहले बनाए गए मास्टर प्लान को ही अभी भी घिसा जा रहा है जिससे शहर में हर व्यवस्था लडख़ड़ाती नजर आती है। हालांकि इस मास्टर प्लान की अवधि गत वर्ष समाप्त हो गई लेकिन नए प्लान के मूर्त रूप लेने तक पुराने प्लान से ही काम चलेगा। ऐसे में शहर को अब नए प्लान का इंतजार है।
शहर के विकास के लिए तत्कालीन नगर पालिका ने 1995 में मास्टर प्लान तैयार किया था जो वर्ष 2016 तक की जरूरतों को देखकर बनाया गया था। नगर परिषद के आला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मास्टर प्लान में शहर के विकास के लिए रेखांकित किए गए नियमों की पालना नहीं की। इसके चलते शहरवासी बिजली, पानी, सफाई जैसी आधारभूत सुविधाओं से तक महरूम है। वहीं बेतरतीब यातायात, पार्किंग की अनुपलब्धता व घटिया ड्रेनेज सिस्टम ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है।
नहीं आई हरियाली
मास्टर प्लान में रीको औद्योगिक क्षेत्र के उत्तर व प्रस्तावित बाईपास के दक्षिण में हरित क्षेत्र विकसित करना था। यहां परिषद की ओर से सघन वृक्षारोपण करने का प्रावधान था, लेकिन 22 सालों में किसी भी पालिका बोर्ड ने यहां पर वृक्षारोपण नहीं कराया। इसी प्रकार बड़े पार्क व खेल मैदान विकसित करने के प्रावधान पर काम नहीं किया गया।
संकरी गलियों से नहीं मिली निजात
मास्टर प्लान में नई सड़कें विकसित करने का प्रावधान था। शहर के भीतरी भागों में यातायात के दबाव को कम करने के लिए रिंग रोड बनाने की भी योजना बनाई हुई थी, लेकिन योजना कागजों में ही सीमित रही। इसके उलट अतिक्रमण व अनदेखी से शहर की भीतरी सड़कों की हालत खराब हो गई। अब लोग जाम और अव्यवस्थायों का शिकार होते हैं।
यातायात के साधनों की व्यवस्था नहीं
मास्टर प्लान में यातायात नगर के लिए हिण्डौन सड़क के उत्तर में रेलवे क्रासिंग से पहले 15 एकड़ जमीन आवंटित करने का प्रावधान किया गया था। यहां रोडवेज आगार, वर्कशाप, भोजनालय व पार्किंग स्थल विकसित करना था, लेकिन परिषद की ओर से इस क्षेत्र में कोई काम नहीं किया गया, जिसके चलते वर्तमान में शहर के बीच में रोडवेज बस स्टैण्ड व प्राइवेट बस स्टैण्ड संचालित है।
ड्रेनेज पर काम
2016 की जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए शहर में बेहतर ड्रेनेज सिस्टम के विकास पर मास्टर प्लान में जोर दिया गया था, लेकिन इस ओर कोई काम नहीं किया गया। इससे मानसून के दौरान शहर तालाब बन जाता है। वहीं पेयजल आपूर्ति के लिए भी नवविकसित कॉलोनियों में पाइप लाइन नहीं डाली गई, जिससे लोगों को गरमियों में पेयजल संकट से जूझना पड़ता है।
गांव रहे गांव
पिछले मास्टर प्लान 1995-2016 में बाढ़ महानंदपुर, चूली,डिबसिया, बड़ौद जाट, खानपुर बड़ौदा, चक छाबा, महूखुर्द, उदेईकलां, ब्रहाबाद, महानंदपुर, मिर्जापुर, नामनेर गांव को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल किया गया, लेकिन दो दशक बीत जाने के बाद भी इन गांवों का शहर की तर्ज पर विकास नहीं हो पाया। आलम यह है कि यहां पर्याप्त बिजली व पेयजल की आपूर्ति तक नहीं की जा रही है।
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