
गंगापुरसिटी नगरपरिषद के बेचे भूखण्डों का हाल
गंगापुरसिटी. सो गया आसमां, सो गई हैं सारी मंजिलें, सो गया है सारा जहां, एक हिन्दी फिल्म के गाने के ये बोल रीको क्षेत्र में नगर परिषद की ओर से काटी गई कॉलोनियों के हालात पर सटीक बैठते हैं। शहरी क्षेत्र के विस्तार को लेकर भले ही नगर परिषद ने नई कॉलोनियां काट दी हो, लेकिन वहां भूखण्ड बेचने से मिली राशि से गद्गद होकर प्रशासन गहरी नींद में सो गया। इसके चलते इन नई कॉलोनियों में सुविधाओं का टोटा बना हुआ है।
हालात ये हैं कि इन कॉलोनियों के लोग मूलभूत सुविधाओं को भी तरस रहे हैं। कई इलाकों में सफाई की व्यवस्था ठप है। रीको क्षेत्र के पास परिषद की ओर से लोगों को भूखण्ड तो बेच दिए गए, लेकिन वहां आज भी न सड़क है न ही पाइप लाइन। इस क्षेत्र में सफाई की व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। कभी कोई सफाईकर्मी क्षेत्र में आता ही नहीं है। यही कारण है कि क्षेत्र गंदगी से अटा नजर आता है। हवा के साथ उड़ती पॉलीथिन, नालियां नहीं होने से कच्चे रास्ते में जमा कीचड़ लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। रीको स्थित मोक्षधाम के पास से कॉलोनी के लिए बने रास्ते कच्चे व ऊबड़-खाबड़ है। इनके किनारों पर बबूल व झाडिय़ां खड़ी है तो इनकी ओट में गंदगी के ढेर भी लगे हुए हैं। इनमें से उठती सड़ांध से यहां से गुजरना भी मुश्किल है। इस रास्ते पर मृत मवेशियों को भी फेंक दिया जाता है। इनके इर्द-गिर्द दर्जनों श्वानों के झुण्ड मण्डराते रहते हैं। इससे राहगीरों को इनके हमले का डर बना रहता है। लोगों को यहां से नाक पर कपड़ा रखकर गुजरना पड़ता है।
खुले में शौच
भारत स्वच्छता मिशन के तहत भले ही केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से गांव-ढाणियों तक को खुले में शौचमुक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा हो, लेकिन यहां नगर परिषद क्षेत्र में खुले में शौचमुक्त वातावरण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। विस्तारित कॉलोनियों के आसपास खाली भूखण्डों व बबूल-झाडिय़ां की ओट में शौच किया जा रहा है। इससे वातावरण दूषित होने के साथ ही सरकार के अभियान की भी पोल खुल रही है। खुले में शौच से होने वाली बीमारियों पर भी अंकुश नहीं लग पा रहा है, जबकि ये कॉलोनियां नगर परिषद के वार्ड में शामिल हैं।
टैंकरों पर निर्भर
सालोदा व कॉलेज रोड क्षेत्र से सटी आबादी में पाइप लाइन के नहीं होने से लोगों को पानी के लिए टैंकर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। मकानों में होद बना रखे हैं। टैंकर मंगा कर वे होद में उसे खाली करा लेते हैं। ऐसे में इसी पानी से नहाने, मवेशियों को पिलाने के साथ उन्हें भी पीना पड़ रहा है। पानी में फ्लोराइड की मात्रा भी अधिक होने से कई प्रकार की जलजनित बीमारियों को न्योता दे रहा है। पाइप लाइन के अभाव में लोगों को महंगे दामों पर टैंकर से पानी खरीदना पड़ रहा है।
नहीं आता कचरा संग्रहण वाहन
शहर की कॉलोनियों में जहां नगर परिषद का कचरा वाहन घूम-घूमकर घर-घर से कचरा संग्रहण करता है, वहीं यह व्यवस्था विस्तारित कॉलोनियों में नजर नहीं आ रही है। नगर परिषद की से विकसित व नई कॉलोनियों में भी कचरा वाहन की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि घरों से निकलने वाले कचरे का सही रूप से निस्तारण हो सके। इसके विपरीत आलम तो यह है कि नगर परिषद का कचरा वाहन भी यहां के रास्ते के किनारे कचरे को खाली कर चलता बनता है।
हिचकोले खाने को मजबूर
कॉलोनी की ऊबड़-खाबड़ डगर पर वाहन गुजरने के दौरान सवारियों को हिचकोले खाने पड़ते हंै। साथ ही वाहनों के भी कल-पुर्जे ढीले होने के साथ कबानियां आए दिन टूट रही है। भारी वाहनों का तो इन रास्तों से गुजरना मुश्किल भरा लगता है। उनके पलटने की आशंका बनी रहती है। जबकि इन कॉलोनियों में ऐसे कई परिवार भी है, जो पशुपालन कर परिवार की रोजी-रोटी चला रहे हैं। कई परिवारों के मकानों व उनके आसपास भैंसे बंधी देखी जा सकती है। वे दूध बेचकर परिवार का पालन करते हैं। इन मवेशियों के लिए उन्हें चारे आदि की आवश्यकता होती है। चारे से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली, पिकअप आदि के गुजरने के दौरान हादसे की आशंका बनी रहती है। रास्तों से अहसास ही नहीं होता कि वे किसी शहर की कॉलोनी में आए हैं। हालात गांव से भी बदतर हैं।
मोक्षधाम के आसपास कीचड़
विस्तारित रीको क्षेत्र की कॉलोनियों में नालियां व पानी निकासी के प्रबंध नहीं है। ऐसे में मोक्षधाम के आसपास गर्मी में भी पानी जमा है। मोक्षधाम के एक हिस्से में तालाब की तरह पानी भरा है। इसमें गंदगी जमा होने से सड़ांध मार रहा है। दिनभर इस पानी में श्वान बैठे रहते हैं। इसके अलावा कॉलोनियों के घरों से निकलने वाले कचरे को भी यहां पानी में डाल देने से सड़ांध मारता है।
अंधेरे की सौगात
नई कॉलोनियों में रात के समय रोशनी की भी पुख्ता व्यवस्था नहीं है। हालांकि घरेलू कनेक्शन के लिए लाइन खींची हुई है। कई स्थानों पर रोड लाइट हैं, लेकिन जलती नहीं है। एक ओर शहर की राहें एलईडी से रोशन है तो नई कॉलोनियों में अंधेरे का राज है। अंधेरे में सर्वाधिक परेशानी बच्चों व बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है।
पैर पसार रहा अतिक्रमण
नगरपषिद की ओर से ध्यान नहीं देने से कॉलोनी के लोगों ने अभी से अतिक्रमण भी करना शुरू कर दिया है। इससे रास्ते अभी से संकरे होने लगे हैं। अधिकतर घरों के शौचालयों के टैंक सड़क पर ही बने हैं। इसके अलावा पत्थर व अन्य प्रकार की निर्माण सामग्री डालकर अतिक्रमण किया हुआ है।
नहीं है जानकारी
नई कॉलोनियों में कब कौन मकान का निर्माण करा रहा है, इसकी अनुमति सम्बन्धी भी नगर परिषद को जानकारी नहीं होती। अधिकतर निर्माण कार्य नगर परिषद से बिना अनुमति लिए ही चल रहे हैं। इससे नगर परिषद को भी राजस्व की हानि हो रही है।
जल्दी ही होगा विकास
रीको क्षेत्र की विकसित कॉलोनियों का जल्दी ही विकास कराएंगे। गंदगी रहने के बारे में किसी ने बताया नहीं। सफाईकर्मी भेजकर क्षेत्र की सफाई भी कराएंगे। अन्य सुविधाएं भी लोगों को उपलब्ध कराएंगे।
संगीता बोहरा, सभापति नगरपरिषद, गंगापुरसिटी।
Published on:
10 May 2018 11:36 am
