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मानसून की बेरुखी से मधुमक्खियों की जान को आफत

पराग व शहद नहीं मिलने से प्रजनन दर घटी, उच्च तापमान से मर रही मधुमक्खियां, मधुमक्खी पालकों को लाखों का नुकसान

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मानसून की बेरुखी से मधुमक्खियों की जान को आफत

सवाईमाधोपुर. बक्शे में मशुमक्खियों की कॉलोनी दिखाता मधुमक्खी पालक।

अरुण कुमार वर्मा
सवाईमाधोपुर. मानसून की बेरुखी सिर्फ किसानों को परेशान नहीं कर रही है। भरतपुर संभाग के मधुमक्खी पालक भी परेशान है। अच्छी बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई थम गई है। नई फसल तैयार नहीं होने से मधुमक्खियों को ‘पराग’ नहीं मिल पा रहा है। इससे उनकी वृद्धि व प्रजनन दर पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इधर, तापमान में बढ़ोत्तरी उनकी मौत का कारण बन रही है।

अभी ये हाल तो नहीं मिलेगा सीजन का फायदा
रबी की मुख्य फसल सरसों में फूल आने के साथ मधुमक्खी पालकों का सीजन शुरू होता है। नवम्बर से मार्च तक इसकी अवधि रहती है, लेकिन इससे पहले मानसून का सीजन मधुमक्खियों के प्रजनन व बढ़ोत्तरी का होता है, जितनी ज्यादा मधुमक्खियां उतना फायदा, लेकिन बारिश नहीं होने से मधुमक्खियों की प्रजनन दर घट गई है। वहीं तापमान ज्यादा होने से उनकी मौत हो रही है।

खत्म हो जाएगी कॉलोनी
जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर नीमली खुर्द गांव के मधुमक्खी पालक ज्योतिष कुमार सिंह ने बताया कि उनके पास करीब 2 सौ बॉक्स है। प्रत्येक बॉक्स में 10 फ्रेम होते है। प्रत्येक फ्रेम में करीब 1 हजार मधुमक्खियां होती हैं। तापमान ज्यादा होने से मधुमक्खियों की संख्या तेजी से कम हो रही है। कई बॉक्स की मधुमक्खियां पूरी तरह खत्म हो गई है। अगर ऐसे हालत रहे और बारिश नहीं हुई तो प्रत्येक बॉक्स पर 4 से 5 हजार रुपए का घाटा होगा। कुल हानि करीब 5 लाख की होगी।

नहीं मिल रहा पराग
मधुमक्खी पालक दरोगा सिंह ने बताया कि सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय के आस-पास बारिश के सीजन में बाजार व तिल्ली की फसल बोई जाती है। वहीं जंगली क्षेत्र होने से मधुमक्खियों को खूब पराग मिल जाता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। मधुमक्खियों की वृद्धि के लिए पराग व तैयार शहद खुराक के लिए चाहिए होता है। यह दोनों चीजें नहीं मिल रही है। विकल्प के तौर पर मधुमक्खियों को चीनी खिलानी पड़ रही है। अब तक 35 हजार रुपए चीनी पर खर्च कर चुके हैं।

बारिश नहीं होने से मधुमक्खियों की प्रजनन दर पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इससे मधुमक्खी पालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ब्रहमसिंह, खेड़ा राम, भरतपुर

बॉक्स...
- भरतपुर संभाग में मधुमक्खी पालन की शुरुआत 1990
- भरतपुर, सवाईमाधोपुर व करौली में सर्वाधिक मधुमक्खी पालन
- संभाग में करीब 4 हजार मधुमक्खी पालक
- शहद का उत्पादन 2400 टन
- एक बक्से को तैयार करने का खर्च 3 हजार
- कंपनी एजेंट करते है मधुमक्खी पालकों से शहद की खरीद
- मधुमक्खी पालक से 80 से 100 रुपए प्रति लीटर में होती है खरीद
- बारिश नहीं होने से प्रतिबक्शा 3 से 5 हजार का नुकसान
- शहद का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग फोटो कैप्शन...
एसएमसीवन. सवाईमाधोपुर. नीमलीखुर्द गांव में मधुमक्खी पालक द्वारा तैयार बक्शे।