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सवाई माधोपुर

टाइगर रिजर्व में जिप्सी की जगह लेगी जिम्मी

एनटीसीए ने शुरू की कवायद

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सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर सहित देश भर के टाइगर रिजर्व में भ्रमण पर जाने वाले पर्यटकों को भ्रमण कराने वाले पर्यटन वाहनों में बहुत जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दरअसल नेशनल टाइगर कनजर्वेशन अथोरियटी (एनटीसीए) की ओर से इस संबंध में कवायद शुरूकर दी गई है। इस संबंध में हाल ही में एनटीसीए की ओर से देश भर के टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को एक पत्र लिखकर उनसे संबंधित टाइगर रिजर्व में अनुमानित जिप्सियोंं की आवश्यकता के आंक डे की जानकारी मांगी है। इसके बाद रणथम्भौर के वन विभाग की ओर से एनटीसीए को 300 जिम्मी की आश्यकता के संबंध में पत्र लिखागया है। अब अन्य टाइगर रिजर्व से आंकडा मिलने के बाद ही एनटीसीए की ओर से इस संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

2026 में जिप्सी विहीन हो जाएगा रणथम्भौर

दरअसल वाहन निर्माता कंपनी की ओर से जिप्सी का उत्पादन 2016 में ही बंद कर दिया था। ऐसे में आखिरी बार रणथम्भौर में नई जिप्सी 2016 में लाई गई थी पूर्व में रणथम्भौर में पर्यटन वाहनों की मॉडल कंडीशन पांच साल की थी। ऐसे में केवल पांच साल तक ही एक जिप्सीव कैंटर को टाइगर रिजर्व में संचालित किया जा सकता था। लेकिन जिप्सी का उत्पादन बंद होने के बाद वन विभाग की ओर से मॉडल कंडीशन को बढ़ाकर पहले सात साल और फिर 10 साल कर दिया था। ऐसे में वर्तमान में 2026 तक रणथम्भौर में मौजूदा जिप्सियों का संचालन किया जा सकता है। लेकिन वर्तमान मॉडल कंडीशन के अनुसार 2026 में सभी जिप्सियां पार्क से बाहर हो जाएंगी। गौरतलब है कि वर्तमान में रणथम्भौर में 269जिप्सी संचालित है।

जिप्सी की जगह जिम्मी लाने की तैयारी

जिप्सी का उत्पादन बंद होने के बाद अब वन विभाग व एनटीसीएकी ओर से टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को सफारी कराने के लिए जिप्सी के स्थान पर जिम्मी को लगाने की तैयारी की जा रही है। गौरतलब है कि जिम्मी भी जिप्सी बनाने वाली कंपनी का ही वाहन है और यह वाहन भी जिप्सीकी ही तरह फोर बाई फोर है। हालांकि एनटीसीए की ओर से संबंधित कंपनी को जिम्मी में आंशिक फेरबदल करने के निर्देश भी दिए गए है। इसके बाद ही जिम्मी का टाइगर रिजर्व में संचालन किया जा सकेगा। लम्बे समय से चल रहा मंथन जिप्सी का उत्पादन बंद होने के बाद कई सालों से वन विभाग की ओर से जिप्सी के विकल्प की खोज की जा रही थी। इसके लिए पूर्व में वन विभाग की ओर से एक दूसरी वाहन निर्माता कंपनी के एक वाहन को भी चिह्नित किया गया था लेकिन उक्त वाहन महंगा होने के कारण बात नहीं बन सकी थी।

इनका कहना है…

एनटीसीए की ओर से जिप्सी के विकल्प के रूप में जिम्मी का चयन किया गया है। हमारी ओर से एनटीसीए को कितनी गाडियों की दरकार है। यह जानकारी एनटीसीए को भेज दी गई है। अंतिम फैंसला एनटीसीए को लेना है। – संदीप चौधरी, उपवन संरक्षक(पर्यटन), रणथम्भौरबाघ परियोजना, सवाईमाधोप ुर।