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कोटापा एक्ट की धारा 5 व 7 के तहत नहीं होती कार्रवाई…, सिर्फ चालान, उत्पाद की जब्ती से परहेज!

अधिनियम का उल्लंघन करने वालों को नहीं मिलती सख्त सजा, समिति सदस्य कर रहे खानापूर्ति

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sawaimadhopur

कोटपा अधिनियम की पालना में लापरवाही बरती जा रही


गंगापुरसिटी. सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों के उत्पादन, वितरण, बिक्री की निगरानी व 18 साल से कम उम्र के युवा, किशोर और बच्चों को इनके इस्तेमाल से दूर रखने के लिए बने कोटपा अधिनियम की पालना में लापरवाही बरती जा रही है। अधिनियम के तहत सख्त सजा व जुर्माने वाली धाराओं के तहत कार्रवाई करने से बचा जा रहा है। इसका सीधा फायदा उत्पादकों व विक्रेताओं को हो रहा है। इधर, बड़े पैमाने पर युवा इसकी लत की चपेट में आ रहे हैं। इनमें से कई कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं, वहीं कई असमय मौत का ग्रास बन चुके हैं।

धड़ल्ले से हो रहा सार्वजनिक जगहों पर ध्रूमपान
सिटी रेलवे स्टेशन और बस स्टैण्ड पर सार्वजनिक रूप से ध्रूमपान करते लोगों को आसानी से देखा जा सकता है। कलक्टर की सामने इंद्रा मैदान और महावीर पार्क में शाम ढलते ही शराबियों का जमावड़ा लग जाता है। शराब की दुकानों के आस-पास लुके-छिपे लोग आसानी से मदिरा का सेवन करते दिख जाते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग इनके
खिलाफ नहीं के बराबर कार्रवाई करते हैं।

यह कहती है धाराएं
अधिनियम की धारा 5 के तहत तम्बाकू उत्पादों का विज्ञापन पूरी तरह से प्रतिबंधित है। वहीं तम्बाकू उत्पाद बेचने वाली दुकानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने का प्रावधान किया गया है। टीवी व अन्य संचार माध्यमों में प्रचार-प्रसार पर पूरी मनाही है। इसीप्रकार धारा 7 में तम्बाकू उत्पादों को वैधानिक चेतावनी लिखे पैकटों में ही बेचने का प्रावधान है। हालांकि अधिकांश पान-गुटखा की दुकानों पर बीड़ी व सिगरेट फुटकर ही मिल जाएगी। यहां पर चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगे हैं।


हो सकती है पांच साल तक की सजा
सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम 2003 (कोटपा) की धारा 5 व 7 का उल्लंघन करते पाए जाने पर 2 से लेकर पांच साल तक की सजा हो सकती है। वहीं कारखाने व दुकानों में स्टॉक किए गए पूरे माल की जब्ती की का प्रावधान है। इधर, जिले में अधिनियम की धारा के लिए बनाई गई जिला स्तरीय समन्वय समिति ने गत 1 अप्रेल से अगस्त माह के अंत तक इन धाराओं के तहत एक भी मामला नहीं बनाया है। हालांकि समिति के नेतृव में उपखण्ड मुख्यालयों पर कार्रवाई कर करीब 400 चालान बनाए गए है, जिनमें 2 सौ से लेकर 1 हजार रुपए का जुर्माना वसूल कर दोषियों को छोड़ दिया गया है।

कर सकते हैं सीधी कार्रवाई
शैक्षिक संस्थाओं के कुलपति, निदेशक हेड मास्टर, रेलवे स्टेशन अधीक्षक, चिकित्सा विभाग के अधिकारी, सरपंच-सचिव, बीडीओ, श्रम कल्याण अधिकारी व डिप्टी एसपी आदि अधिनियम के तहत सीधी कार्रवाई कर सकते हैं। इनको जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से चालान बुक भी उलब्ध कराई गई हैं।
&अधिनियम की प्रभावी पालना के लिए कार्रवाई की जाती है। कई विक्रेताओं पर जुर्माने लगाए गए है। हालांकि जब्ती या चालान पेश करने जैसी सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।
अर्पित भारद्वाज, जिला समन्वयक, कोटपा, सवाईमाधोपुर

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