6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नेता ना नेतृत्व फिर भी एतिहासिक बंद रहा गंगापुर शहर

रोडवेज के भी थमे रहे पहिए सिटी परिवहन भी रहा ठप सोशल मीडिया पर वायरल संदेश का असर साढ़े आठ घंटे बंद रही नेट सर्विस

5 min read
Google source verification
patrika sawaimadhopur hindi news rajasthan

नेता ना नेतृत्व फिर भी एतिहासिक बंद रहा गंगापुर शहर

गंगापुरसिटी. नेता था ना कोई नेतृत्व। रैली थी ना ही कोई जुलूस। आह्वान था ना आग्रह। निर्देश थे ना ही आदेश। फिर भी गंगापुरसिटी शहर मंगलवार को पूरा बंद था। शायद ये इतिहास में पहली बार हुआ कि बिना किसी नेतृत्व व आह्वान के शहर के सभी बाजार बंद रहे। यहां तक की रोडवेज बसों के पहिए भी थमे रहे। सिटी परिहवन के रूप में एक दर्जन ऑटो रिक्शा ही बिना सवारियों के दौड़ते दिखाई दिए। ये बंद पूर्णतया शान्तिपूर्ण रहा। क्यों कि बंद स्वप्रेरणा से था। इससे शहर में कहीं भी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। इससे पुलिस व प्रशासन ने राहत की सांस ली है। लोग जरूरी कामों से ही घरों से बाहर निकले। हालांकि व्यापार संघ की ओर से बाजार खुले रखने के बारे में समाचार पत्रों में दिए गए बयानों को पढ़कर सुबह कुछ व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान खोल लिए थे, लेकिन सुबह ११ बजे तक अधिकांश बाजार के बंद रहने पर वे भी अपने प्रतिष्ठान बंद कर घरों को चले गए। दूसरी ओर प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से सुबह सात बजे से ही नेट सर्विस बंद कर दी थी। ये सर्विस फिर से दोपहर साढ़े तीन बजे बहाल की गई। दरअसल में कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर '१० अप्रेल को भारत बंदÓ का संदेश वायरल हो रहा था। किसी अनहोनी की आशंका में चार दिन से पुलिस व प्रशासन लगातार व्यापारियों से सम्पर्क कर बंद को टालने में लगा था। सीएलजी की बैठकें भी ली गई। इन सभी बैठकों में व्यापारी संगठनों ने आश्वस्त किया था कि दस अप्रेल को प्रस्तावित बंद से उनका कोई सरोकार नहीं है। इसके बाद भी मंगलवार को शहर पूरी तरह बंद रहा। हालांकि चाय व वाहन मिस्त्रियों की कुछ दुकानें खुली, लेकिन ग्राहकों के नहीं आने से वे भी ठाले बैठे रहे। आलम ये रहा कि दोपहर तीन बजे बाद वे भी घरों को चले गए। बंद का सबसे ज्यादा असर शहर के अलावा सालोदा रोड व उदेई मोड़, सैनिक नगर, कॉलेज रोड आदि पर देखने को मिला। उल्लेखनीय है कि गत दो अपे्रल को भारत बंद के दौरान इन क्षेत्रों में तोडफ़ोड़, आगजनी व हिंसा की सर्वाधिक घटनाएं हुई थी। इसके चलते शहर में कफ्र्यू लगाना पड़ा था। बंद को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे। शहर के प्रत्येक चौराहे से लेकर मुख्य गलियों व बाजार में आरएसी व पुलिस के जवान तैनात किए गए थे।


बैठे रहे दुकानों के बाहर
बंद के मद्देनजर शहर की दुकानें तो बंद रही, लेकिन दुकानदार उनके बाहर तख्तों पर बैठे बतियाते रहे। उन्होंने दिनभर हंसी-ठिठोली में बिताया। सभी के चेहरों पर मुस्कान थी। हालांकि किसी के पास यह स्पष्ट जवाब नहीं था कि आखिर बाजार बंद किसके आह्वान व आग्रह पर रखा गया।

एक-दूसरे का किया अनुसरण
बाजार बंद में दुकानदारों के बीच एक-दूसरे का अनुसरण देखने को मिला। पड़ोस की दुकान बंद देख साथी पड़ोसी दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें नहीं खोली। दुकानदार एक-दूसरे की दुकानें बंद देख बाजार बंद रखने के लिए प्रेरित होते गए। सुबह जिन दुकानदारों ने जल्दबाजी में दुकानें खोल ली थी वे भी बाजार को बंद देख अपनी दुकानों को बंद कर बाहर तख्त पर बैठ गए।

ग्राहक तलाशते रहे
बंद को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल संदेश के चलते ग्रामीण क्षेत्र से खरीदारी के लिए लोग बाजार में अन्य दिनों की अपेक्षा कम आए। जो आए वो खुली दुकानों की तलाश में भटकते रहे। सभी जगह बंद रहने से उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ा। शहर में दुकानें बंद रहने से जहां बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा, वहीं चाय-जूस की मुख्य चौराहों, बस स्टैण्ड आदि के पास स्थित दुकानों पर चहल-पहल रही। हालांकि यहां पर आवश्यक कार्य से घरों से निकले या फिर बाजार में बंद की स्थिति की टोह लेने के लिए निकले लोगों ही थे।

बस स्टैण्ड पर भी सन्नाटा
रोडवेज बस स्टैण्ड पर जहां अमूमन भीड़भाड़ के चलते जाम की स्थिति रहती थी, वहीं बंद के चलते यहां सन्नाटा देखने को मिला। रोडवेज बसों का संचालन भी कम ही हो पाया। बस स्टैण्ड पर अन्य दिनों की तरह बसें खड़ी नजर नहीं आई। इसके अलावा बुकिंग के भी ताला लगा था। यात्री भी अन्य दिनों की अपेक्षा बस स्टैण्ड पर नजर नहीं आए। आवश्यक कार्य से बाहर जाने वाले यात्रियों ने बसों के स्थान पर ट्रेन का रुख किया।

सालोदा में सन्नाटा
गत दिनों जिस क्षेत्र में पथराव व आगजनी की घटना हुई उस क्षेत्र में बंद के मद्देनजर सन्नाटा पसरा रहा। दुकाने बंद रही तो आवाजाही भी न के बराबर रही। बिना किसी दबाव के सालोदा, उदेई मोड़, सैनिक नगर में सभी दुकानें बंद रही। इसके अलावा ओसवाल चुंगी नाका, प्राइवेट बस स्टैण्ड रोड, फव्वारा क्षेत्र, नया बाजार, चौपड़ बाजार, खारी बाजार, इन्दिरा बाजार, चूड़ी बाजार, चौथमाता बाजार, ट्रक यूनियन, ईदगाह, मिर्जापुर, चूली गेट क्षेत्र समेत शहर के विभिन्न बाजारों में अधिकतर दुकानें बंद रही।


अवकाश का दिन
शहर की सड़कों पर कम चहल-पहल तथा बाजार में बंद दुकानों को देख ऐसा लग रहा था मानों अवकाश का दिन है। बाजार बंद का असर सरकारी कार्यालयों में भी देखने को मिला। इन कार्यालयों में भी अन्य दिनों की अपेक्षा सुनसान माहौल रहा। ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों के नहीं आने से चहल-पहल कम रही।

किसी ने नहीं रोका
शहर में बाजार बंद के दौरान कोई किसी को टोकने वाला था और ना ही रोकने वाला। स्वत: ही दुकानदारों ने बंद रखा। खुली हुई दुकान को किसी ने बंद नहीं कराया। हालांकि कानून व शांति व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस व प्रशासन सतर्क रहा। शहर के मुख्य प्वाइंट पर पुलिसकर्मी चार से पांच के समूह में तैनात किए गए थे। वे स्थिति पर नजर बनाए हुए थे।

प्रशासन ने बरती पूरी सावधानी
पुलिस व प्रशासन ने बंद के मद्देनजर पूरी सावधानी बरती। गत दिनों से चल रहे बंद के वायरल संदेश के चलते अंदरूनी तौर पर पुलिस व प्रशासन सतर्क रहा। इसके तहत सीएलजी की बैठकें लेकर लोगों से कानून व शांति बनाए रखने की अपील के साथ सुरक्षा व्यवस्था बतौर भी पूरी तरह से सतर्क रहा। गत दिनों हुई घटना को ध्यान में रखते हुए पुलिस व प्रशासन की बरती गई यह सावधानी सराहनीय भी रही।


नेट सेवा रही बंद
बंद के मद्देनजर क्षेत्र में सुबह सात बजे से ही इन्टरनेट सेवा बंद कर दी गई। ये सवा दोपहर साढ़े तीन बजे सुचारू हो सकी। इस दौरान स्मार्ट फोन लोगों के लिए की-पेड मोबाइल बनकर रहे गए। वे संदेश भेज सके ना ही कहीं से उनके पास संदेश आए। ऐसे में अफवाहों पर पूरी तरह से रोक लगी रही। शहर में आवश्यक सेवाएं आम दिनों की तरह ही सुचारू रही। अस्पताल, मेडिकल स्टोर, प्याऊ, सब्जी मण्डी, चाय, पान, कचौरी-पकौड़ी, जूस आदि की कुछ दुकानें खुली रही। इसके अलावा पेट्रोल पम्प, मिस्त्रियों की दुकानें खुली रही।


शिक्षण संस्थान संचालक रहे असमंजस में
सोशल मीडिया पर वायरल संदेश के चलते शिक्षण संस्थान संचालक भी असमंजस की स्थिति में रहे। यहां तक की सरकारी स्कूलों में भी यही स्थिति देखने को मिली। हालांकि अधिकतर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल ही नहीं भेजा, लेकिन जिन्होंने भेजा वे भी जल्दी ही उन्हें लेने स्कूल पहुंच गए। अन्य दिनों की तरह स्कूल खुलने व छुट्टी होने के समय के दौरान शहर की सड़कों पर स्कूली वाहन दौड़ते नजर नहीं आए। राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि बंद के दौरान कहीं नजर नहीं आए।

मुनाफे की नहीं की परवाह
इन दिनों बाजार में सीजन की ग्राहकी चल रही है। अक्षय तृतीया, पीपल पूर्णिमा जैसे अबूझ सावे पास हैं। इसके अलावा शुभ मुहूर्त के सावों की भी भरमार है। ऐसे में जेवरात से लेकर कपड़े, शृंगार, बर्तन, इलेक्ट्रिक सामान, परचून समेत शादी-समारोह की खरीदारी को लेकर ग्राहकों की दिनभर भीड़ रहती है। दिन में दुकानों के आगे पैर रखने को व पैदल निकलने को बाजारों में जगह नहीं मिल रही थी। इसके बाद भी दुकानदारों ने मुनाफे की परवाह नहीं कर बंद रखा।


टे्रनों का संचालन सुचारू
दिल्ली-मुम्बई रेल मार्ग पर मंगलवार को ट्रेनों का संचालन आम दिनों की तरह सुचारू रहा। हालांकि यात्री भार में कमी रही।स्टेशन पर भी अन्य दिनों की तरह स्थिति सामान्य रही। हालांकि रेलवे स्टेशन से टैम्पो का संचालन नहीं होने से कई यात्रियों को पैदल ही गंतव्य तक जाना पड़ा। कुछ ने परिजनों व परिचितों के वाहनों से लिफ्ट ली।


मौसम ने दिया साथ
बंद के मद्देनजर मौसम भी शांत व सुहाना रहा। बादल छाए रहने व हल्की हवा चलने के अलावा सुबह बूंदाबांदी से दोपहर में मौसम सुहावना रहा। राहगीरों को धूप की तल्खी का सामना नहीं करना पड़ा।

बड़ी खबरें

View All

सवाई माधोपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग