
जीवन रेखा पर कटौती की मार
गंगापुरसिटी. जल ही जीवन है। सभी मानते भी हैं कि बिन 'पानीÓ सब सून है, लेकिन यहां शहर में इन सब बातों का जलदाय विभाग पर कोई असर नहीं है। यही कारण है कि शहर में अभी गर्मी की दस्तक ठीक से हुई भी नहीं कि दो दिन के अन्तराल में जलापूर्ति की जाने लगी है। जीवन की 'रेखाÓ कही जाने वाली जलापूर्ति पर कटौती की मार से लोग बेहाल होने लगे हैं। उन्हें पानी के लिए अपने स्तर पर ही जैसे-तैसे व्यवस्था करनी पड़ रही है। शहर में अभी से बने इन हालातों से हर कोई परेशान है। उनका कहना है कि मई-जून में हालात की कल्पना करके ही उनकी रूह कांप रही है। अभी मार्च की शुरुआत में ही 48 घंटों के अन्तराल में पानी की आपूर्ति ने बेचैनी बढ़ा दी है। जो जलापूर्ति की जा रही है, वो भी पर्याप्त नहीं है। कई कॉलोनियों के नलों में पानी ही नहीं पहुंच पाता। लोगों की ओर से इसे लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे जाने लगे हैं।
ये है स्थिति : शहर की कुल जनसंख्या करीब एक लाख 30 हजार है। इसमें जलदाय विभाग के कुल 12 हजार 500 वैध नल कनेक्शन हैं। इन नलों में जलापूर्ति के लिए 48 नलकूप तथा एक कुआं है। जल संग्रहण के लिए चार टंकियां हैं। इसके अलाव 288 हैण्डपम्प हैं, लेकिन इनमें से 88 खराब हैं। इन्हीं जल स्रोतों पर पूरा शहर निर्भर है। शहर में लोगों की मांग के अनुसार उन्हें प्रतिदिन 126 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है, लेकिन इसके विपरीत वर्तमान में मात्र 46 लाख लीटर ही आपूर्ति की जा रही है। कुछ दिनों पहले तक 48 लाख लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही थी। अबइसमें दो लाख लीटर पानी की कटौती कर दी गई।
आवश्यकतानुसार नहीं मिल रहा
शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में पानी की खपत अलग-अलग है। शहरी क्षेत्र में लोग केवल जलदाय विभाग की आपूर्ति पर ही निर्भर हैं। कई कार्यों के चलते लोगों को पानी की आवश्यकता भी अधिक रहती है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र में भी पेयजल, मवेशियों आदि के लिए पानी की आवश्यकता होती है। शहरी क्षेत्र में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 150 लीटर पानी की आवश्यकता रहती है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 75 से 100 लीटर तक की आवश्यकता होती है। शहरी क्षेत्र में इन दिनों मांग के विपरीत मात्र 40 से 50 लीटर पानी ही प्रति व्यक्ति उपलब्ध कराया जा रहा है।
मध्यम व निम्न वर्ग की बढ़ी परेशानी
शहर में जल संकट को लेकर मध्यम व निम्न वर्ग के लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। साधन सम्पन्न लोग तो टैंकरों से पानी खरीद कर या फिर निजी ट्यूबवैल लगाकर इंतजाम कर लेते हैं, लेकिन निम्न व मध्यम वर्ग के लोगों को महंगे दामों में पानी के टैंकर खरीदने में आर्थिक तंगी रोड़ा बन जाती है। ऐसे में उन्हें दूर-दराज स्थित जल स्रोतों व निजी ट्यूबवैल से पानी लाना पड़ता है। गर्मी की शुरुआत से ही शहर के सभी 45 वार्डों में जलसंकट गहराने लग जाता है। इस बार तो सर्दी के दिनों में ही जल संकट से लोग परेशान रहे।
दौड़ रहे हैं निजी टैंकर, सरकारी एक भी नहीं
जल संकट को लेकर कई गली-मोहल्लों तथा सड़कों पर पानी के टैंकर दौड़ते नजर आते हैं। लोगों को निजी तौर पर महंगे दामों में इन टैंकरों से पानी खरीदना पड़ता है। चार हजार लीटर पानी से भरा एक टैंकर 350 रुपए में बेचा जा रहा है। विभाग की ओर से फिलहाल एक भी टैंकर शहर में नहीं लगाया गया है। हालांकि े 24 लाख रुपए का कंटीजेंसी प्लान बनाकर सरकार को भेजा गया है।
फैक्ट फाइल
कुल जनसंख्या 1,30,000
कुल नल कनेक्शन 12,500
नलकूप 48
कुल हैण्डपम्प 288
चालू 200
खराब 88
कुआं 01
मांग 126 लाख लीटर
आपूर्ति 46 लाख लीटर
टंकियां 04
टैंकर 00
जलापूर्ति 48 घण्टे में एक बार
(स्रोत जलदाय विभाग)
भेज रखे हैं प्रस्ताव
शहर में जल संकट को देखते हुए सरकार को प्रपोजल बनाकर भेजा हुआ है। इसके तहत 10 ट्यूबवैल लगाने, पांच किमी पाइप लाइन बिछाने, जिन क्षेत्रों में पानी के टैंकरों की जरूरत होगी वहां जलापूर्ति कराने आदि शामिल है। विभाग की ओर से अमृत जल योजना के तहत भी जलापूर्ति के प्रयास जारी हैं।
प्रदीप मीणा, सहायक अभियंता जलदाय विभाग, गंगापुरसिटी।
Published on:
09 Mar 2018 10:33 am
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