सवाईमाधोपुर. अब पहले जैसा काम नहीं रहा। लोहा महंगा हो गया है। लोग भी कम ही लोहे की बनी वस्तुएं खरीदते है। मशीनी युग से हमारा रोजगार छिन गया है। फुटपाथ या सड़क किनारे ही दशकों से सर्दी, गर्मी व बारिश में जीवन गुजर-बसर कर रहे है। सरकार की ओर से भी मदद नहीं की जा रही है। ऐसे में वर्तमान में दो जून की रोटी का भी गुजारा करना दूभर हो रहा है। लोगों का हमारी ओर रूझान नहीं होने से हमारे व्यवसाय पर संकट के बादल मंडरा रहे है। लोग लोहे से जुड़े रेडिमेड सामानों को खरीदना पसंद कर रहे है। इसके चलते हमारी दिहाड़ी भी नहीं निकल रही है। इस संबंध ने शनिवार पत्रिका टीम ने गाडिय़ां लुहारो की बस्तियों में पहुंचकर उनकी पीड़ा को जाना तो उन्होंने खुलकर अपनी समस्याएं बताई।
सरकारी योजनाओं से वंचित
राज्य सरकार की ओर से खानाबदोशों की जिंदगी जीने वाले गाडिय़ा लोहार जाति के लोगों के पुनर्वास और शिक्षा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है लेकिन जागरूकता के अभाव व प्रशासनिक उदासीनता के कारण आज भी गाडिय़ा लुहार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है। ऐसे में वे आज भी खानाबदोशों की तरह जिंदगी जीने व दर-दर की ठोकरे खाने पर मजबूर है। एक ओर सरकार प्रत्येक सिर को छत देने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार की आवासीय योजना ला रही है। इसके तहत हर प्रकार के भूमिहीन को जमीन देने की योजना है। वहीं दूसरी ओर जिले में गाडिय़ा लुहार अपना अभावमय व संकटग्रस्त जीवन इन्हीं काठ की गाडिय़ों में बीता रहे हैं। स्थाई रूप से निवास बनाने की इच्छा वाले गाडिय़ा लुहारों के लिए तंबू ही आशियाने के समान है।
500 से अधिक है परिवार
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार जिले में वर्तमान में 500 से अधिक गाडिय़ा लोहार परिवार है। ऐसे में अगर गाडिय़ां लुहार की कुल संख्या ढाई से तीन हजार के आसपास है। इस जाति की आजीविका का मुख्य पेशा लोहे का काम करना है।
आधे से अधिक के पास नहीं है दस्तावेज
सरकार कीओर से हर किसी के लिए आधार कार्ड व अन्य आवश्यक दस्तावेज जरूरी किए गए है। साथ ही घर-घर जाकर ये दस्तावेज बनाए जा रहे है लेकिन इसके बाद भी अधिकतर गाडिय़ा लोहारों के पास आधार कार्ड व अन्य आवश्यक दस्तावेज नहीं है। ऐसे में उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिला मुख्यालय पर आठ से अधिक डेरे
गाडिय़ा लुहार परिवारों के जिला मुख्यालय पर आठ से अधिक डेरे है। इनमें खैरदा, आवासन मण्डल रोड, अनाज मण्डी रोड, पुलिस लाइन आदि स्थान प्रमुख है। इसके अलावा खण्डार, बौंली, बामनवास आदि ग्रामीण क्षत्रों में भी इनकी अच्छी खासी संख्या है।
अशिक्षा है प्रमुख कारण
अशिक्षा के चलते गाडिय़ा लोहार परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। गरीबी के चलते मकान तक नहीं है और दो वक्त का भोजन का भी जुगाड़ नहीं हो पाता है। फुटपाथ या सरकारी जमीन या सड़क किनारे जहां भी जगह मिलती है, तंबू लगाकार रह लेते है। स्थिति ये है इनके बच्चों के लिए पढ़ाई की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इनके बच्चे सड़क पर ही जन्म लेते है और सड़क पर ही दम तोड़ देते है। यहां तक की इनके पास ना राशन कार्ड है और ना ही आधार कार्ड है।
ये बोले गाडिय़ा लुहार के लोग…
नहीं मिलती सरकारी से मदद
सरकारी मदद नहीं मिलने से गरीबी में जीवन बिता रहे है। फुटपाथ या यहां भी जगह मिलती है, वहां ही तंबू लगाकर रह लेते है। आधुनिक दौर में मशीने आने से रोजगार भी छिन गया है। ऐसे में सरकार की ओर से भी कोई मदद नहीं मिल रही है।
श्रवण लुहार, आवासन मण्डल, सवाईमाधोपुर
मशीनों ने छिना रोजगार
सरकार की ओर से मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही है। पूर्व में लोहे के सामान चिमटा, हंसिया, खुरपी, कुल्हाड़ी बनाकार घर-घर बेचते थे लेकिन मशीनी युग आने से बड़ी-बड़ी कंपनियों के बनाए सस्ते अधिक बिकने लगे है और हमारे हाथों के बनाए हुए लोहे के सामानों की बिक्री कम होने लगी है। ऐसे में सरकार को आर्थिक मदद मिलना जरूरी हो गया है।
मनवा देवी लुहार, सवाईमाधोपुर
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इनका कहना है
गाडिय़ों लोहारों के लिए सरकार ने नगरपरिषद व ग्राम पंचायत से पट्टा मिलने के बाद भवन बनाने की योजना चला रखी है। ऐसे में हमने कई जगहों पर पट््टा मिलने के बाद भवन भी बनाए है। यदि नगरपरिषद इनको पट््टा बनाकर देती है, तो हम पत्रावली तैयार कर भवन निर्माण कराया जाएगा।
कालूराम मीणा, सहायक निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, सवाईमाधोपुर