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मुकुंदरा का ताज पहनने निकला वनराज,खुद ही चल दिया मुकुंदरा की राह पर…

रास्ते में कई मुश्किलें, फिर भी बढ़ रहा आगे,सिर्फ 40 किलोमीटर दूर है मंजिल
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सवाई माधोपुर

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Abhishek Ojha

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Updated: 15 Dec 2017, 7:49 PM IST

sawaimadhopur

sawaimadhopur ranthmbhor Tiger t-91

सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से निकलकर रामगढ़ विषधारी अभयारण्य पहुंचा बाघ टी 91 खुद ही मुकुंदरा की राह पर चल दिया है। वन विभाग को दिसम्बर में मुकंदरा राष्ट्रीय उद्यान में तीन बाघों को शिफ्ट करना है। इसमें टी 91 को भी शामिल किया गया है, लेकिन वन विभाग की शिफ्टिंग से पहले ही उसने अपना रास्ता खुद चुन लिया। वर्तमान में बाघ रामगढ़ विषधारी अभयारण्य से भी निकलकर धीरे-धीरे मुकुंदरा की ओर बढ़ रहा है। मुकुंदरा तक पहुंचने के लिए बाघ को करीब 40 किलोमीटर का रास्ता ही तय करना है।

रामगढ़ से निकलकर पहुंचा बूंदी के आबादी क्षेत्र में : बाघ टी 91 गत 10 दिसम्बर को रामगढ़ अभयारण्य से बाहर निकलकर बूंदी के जंगलों में आ गया था। यहां से 11 दिसम्बर से इसके पगमार्क नहीं मिल रहे थे। ऐसे में विभाग की नींद उड़ी हुई थी। गत दिनों बाघ की जानकारी लेने पहुंचे मुख्य वन संरक्षक ने भी इसको लेकर काफी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद रामगढ़ अभयारण्य की टीम को भी इसकी तलाश में लगाया गया। गुरुवार को बाघ के पगमार्क बूंदी के पास ही सथूर व फूलसागर के आसपास के क्षेत्र में देखे गए। हालांकि बाघ की वास्तविक स्थिति का अब भी पता नहीं लग सका है।

हाइवे तक के मिले पगमार्क
बाघों के रणथम्भौर से मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान पहुंचने के दो रास्ते माने गए है। एक चम्बल नदी से होते हुए कालीसिंध नदी के रास्ते गागरोन होते हुए मुकुंदरा का रास्ता है। पूर्व आईएफएस अधिकारी वीके सालवान ने बताया कि इस रास्ते पर पहले ब्रोकन टेल व टी 35 निकली थी। इसमें से ब्रोकन टेल मुकुंदरा पहुंच गया था और टी 35 सुल्तानपुर के पास ही रुक गई थी। वहीं दूसरा रास्ता रामगढ़ अभयारण्य होते हुए हाइवे पार कर कालंदा के जंगल से होते हुए जवाहर सागर व मुकुंदरा पहुंच जाए। वर्तमान में टी 91 ने यह रास्ता पकड़ा है। यह सथूर के पास के क्षेत्र में है। विभाग को संशय है कि यह हाइवे पार कर कालंदा की ओर निकल गया है।

मध्यप्रदेश तक घूम आया है टी 91
गत वर्ष बाघ टी 91 कैलादेवी अभयारण्य के रास्ते मध्यप्रदेश के जंगलो तक भी पहुंच गया था। जानकारों का मानना है कि यह बाघ एक दिन में 60 से 70 किलोमीटर चलता है। ऐसे में कालंदा के रास्ते यह कुछ ही दिनों में मुकुंदरा में पहुंच जाएगा।

टी 91 की ट्रेकिंग जारी है। बाघों के लिए कालंदा के जंगल से मुकुंदरा अधिक दूरी पर नहीं है। बाघ किधर जाता है यह तो अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन मुकुंदरा के आसपास ही है।
घनश्याम शर्मा, मुख्य वन संरक्षक, कोटा वन्यजीव

आबादी क्षेत्र में आया बाघ सवाईमाधोपुर. खण्डार क्षेत्र के मईकलां गांव में गुरुवार रात करीब दस बजे आबादी क्षेत्र में बाघ आ गया। बाघ ने भैंस पर हमला किया। भैंस के चिल्लाने पर ग्रामीण एकत्र हो गए और बाघ को खेतों में भगा दिया।
सूचना पर मौके पर पहुंचे खण्डार थानाधिकारी रोहित चावला व वनकर्मी मौके पर पहुंचे और बाघ को तलाश किया, लेकिन अंधेरा होने के कारण बाघ के पगमार्क भी ट्रेस नहीं हो पाए हैं। इस संबंध में खण्डार रेंजर मोहनलाल गर्ग ने बताया कि गांव में खेतों में पास बाघ के आने की सूचना मिली थी। अभी ट्रैकिंग की जा रही है।
यह कोई अन्य वन्यजीव भी हो सकता है।