
सवाईमाधोपुर शहर का लटिया नाला।
सवाईमाधोपुर. मैं लटिया नाला हूं। भू-गर्भिय हलचलों से सैकड़ों साल पहले जब अरावली की उप्त्यकाएं अपने अस्तित्व में आईं। मैंने भी अपने आकार-प्रकार को प्राप्त किया। तब से मैं यहां मौजूद हूं। सवाई ने जब 'शहरÓ को बसाना शुरू किया। इसके शैशवकाल से यौवन प्राप्त करने तक के सफर का मैं साक्षी रहा हूं। नगर के वैभव की अभिवृद्धि में मैंने जी तोड़ मेहनत की है। मानसून के समय में आकाश से बरसी बंूदों को अपने दामन में समेटा है। कभी इन बूंदों ने रौद्र रूप धारण किया और विशाल जलराशि बनकर इस शहर को कुचलने बरबाद करने को आगे बढ़ी तो मैंने उनको अपनी मजबूत बाहों में भरकर शहर के बाहर तक का रास्ता दिखाया है। अपने दामन में कुओं को जगह देकर यहां के बाशिंदों की प्यास को हर लिया है। मैंने हर वो कदम बढ़ाया है, जिससे यह शहर फले-फूले, लेकिन यहां बसे लोगों ने मुझे उतना ही निराश किया है। मेरे दामन पर अतिक्रमण कर मेरे स्वरूप को बिगाडऩे से लेकर। मल-जल से भरे नालों को मेरे पर उड़ेल देने तक। सैकड़ों शिकायतें हैं, जिनका कोई वार-पार नहीं है...। कुछ यह है लटिया नाले की दुख भरी कहानी। शहर की जीवनरेखा होने के बावजूद जिला प्रशासन व नगर परिषद की अनदेखी के चलते आज लटिया नाला अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। शहर लटिया नाला खण्डार रोड स्थित गैस गोदाम के यहां से शुरू होकर सूरवाल बंाध तक है। शहर व बजरिया की आधा दर्जन से अधिक कॉलोनी व दो गांव के नाले जुड़ते हैं।
पानी का हो डायवर्जन : लटिया नाले में शहर का दूषित पानी बहता है। नगरपरिषद को इस पर योजना बनाने की आवश्यकता है।
इन क्षेत्रों को
करता है कवर
शहर, बजरिया, हाउसिंग बोर्ड, खैरदा, बालमंदिर कॉलोनी, रीको क्षेत्र, जटवाड़ा, धमूण व सूरवाल गांव आदि।
फैक्ट फाइल
एनिकट - दो बने जंगल में
चार दीवारी
एक किलोमीटर लम्बाई
लटिया नाले की लम्बाई
14 किमी.
चौड़ाई - 150 फीट, लेकिन अतिक्रमण से कम हो रहा।
शहर लटिया नाला नगर परिषद की अनदेखी के चलते सिकुड़ गया है। ऐसे में अतिवृष्टि के दौरान नाला क्षेत्र में बने मकान आदि को खतरा रहेगा। इसके लिए प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा। शहर से सूरवाल तक नाले में जगह-जगह अतिक्रमण हो रहा। इसे हटाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
बालकृष्ण शर्मा, बजरिया।
पूर्व में नाले का स्वरूप चौड़ा व गहरा था। लेकिन नगर परिषद की अनदेखी के चलते नाले में लोगों द्वारा अतिक्रमण करने की होड़ सी मची है। इससे नाले का स्वरुप खत्म हो गया है। नाले में नगर परिषद का कचरा डालने से इसकी भराव क्षमता कम हुई है। तेज बारिश के दिनों लोग इसका शिकार होंगे। घर जलमग्न हो जाएंगे।
हंसराज शर्मा, पूर्व विधायक
करीब 20 वर्ष पूर्व तेज बारिश होन से नाले का बहाव अधिक रहता था। उस दौरान नाले की चौड़ाई व ऊंचाई अधिक होने से नाले का पानी सड़क पर नहीं आता था, लेकिन वर्तमान में अतिक्रमण के चलते नाले का स्वरुप सिकुड़ गया है। इसका खामियाजा बारिश में लोगों को भुगतना पड़ता है। थोड़ी सी बारिश में नाले का पानी सड़क पर आ जाता है।
चक्रधर शर्मा, निवासी भैरूदरवाजा शहर।
लटिया नाले का स्वरुप दिनों दिन खत्म हो रहा है। इसके रोकने के लिए प्रशासन लटिया नाले विकास की कार्ययोजना बनाएं। नाले की चारदीवारी, गहराई बढ़ाना, नाले के ऊपर दोनों ओर पेड़ पौधों लगा कर हरियाली करने, अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभारी कार्रवाई करने, नाले में गंदे पनपने से हो रही अवैध सब्जी की खेती पर रोक लगानी चाहिए।
रामजीलाल जोशी, शहर
Published on:
20 Mar 2018 11:12 am
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