
सवाईमाधोपुर. नेशनल टाइगर कनजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की ओर से पूर्व में रणथम्भौर से तीन बाघिनों को शिफ्ट करने की अनुमति जारी की जा चुकी है। इसके बाद विभाग की ओर से पूर्व में एक बाघिन को कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और एक बाघिन को बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जा चुका है। पूर्व में सरिस्का भेजने के लिए बाघिन को चिह्नित किया गया था, लेकिन उस समय बारिश होने के कारण बाघिन ट्रेस नहीं होने के कारण सरिस्का बाघिन नहीं भेजी जा सकी थी। रणथम्भौर बाघ परियोजना में जल्द ही एक बार फिर से शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इस बार रणथम्भौर से बाघिन को सरिस्का भेजा जाएगा। वन विभाग के सूत्रों की माने तो विभागीय स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई है। जल्द ही बाघिनों की ट्रेकिंग व मॉनिटरिंग को शुरू किया जा सकता है।
मेले के कारण अटक गया था मामला
पूर्व में एक बार तो बारिश के कारण शिफ्टिंग रुक गई थी। इसके बाद त्रिनेत्र गणेश के लक्खी मेले के कारण शिफ्टिंग को रोक दिया गया था। उस समय विभागीय अधिकारियों ने सरिस्का में बाघिन मेले के बाद भेजे जाने की बात कही थी। अब गणेश मेला भी सम्पन्न हो चुका है। ऐसे में अब जल्द ही रणथम्भौर से बाघिन को शिफ्ट किया जा सकता है।
खण्डार रेंज से की जा सकती है शिफ्टिंग
वनाधिकारियों ने बताया कि विभाग की ओर से रणथम्भौर के नॉन ट्यूरिज्म जोन से ही बाघिन को शिफ्ट किया जाएगा। ताकि एक अक्टूबर से शुरू होने वाले नए पर्यटन सत्र में पर्यटन पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़े। पूर्व में विभाग की ओर से खण्डार रेंज से शिफ्टिंग के लिए बाघिन टी-133 का चयन भी किया गया था, लेकिन शिफ्टिंग नहीं हो सकी थी। विभाग की मंशा ऐसी बाघिन को शिफ्ट करने की है, जिसकी उम्र ढाई से तीन साल की हो और वह अभी तक एक बार भी मां नहीं बनी हो।
डब्ल्यूआइआइ की टीम आने के बाद ही होगी शिफ्टिंग
वनाधिकारियों ने बताया कि एनटीसीए के प्रॉटोकाल के तहत बाघ या बाघिन को ट्रेंकुलाइज करने के लिए ऑपरेशन के दौरान डब्ल्यूआइआइ की टीम के सदस्यों का भी मौजूद होना अनिवार्य है। पूर्व में भी इस संबंध में विभाग की ओर से डब्ल्यूआइआइ को पत्र लिखा गया था, लेकिन सरिस्का बाघिन भेजने के लिए डब्ल्यूआइआइ की टीम रणथम्भौर नहीं पहुंची थी। ऐसे में अब जल्द ही विभाग की ओर से दुबारा डब्ल्यूआइआइ को पत्र लिखने की तैयारी की जा रही है।
एक बाघिन को सरिस्का शिफ्ट किया जाना है। जल्द ही इसके लिए बाघिनों की मॉनिटरिंग व ट्रेकिंग की कवायद शुरू की जाएगी।
पी. काथिरवेल, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना,सवाईमाधोपुर।
Published on:
23 Sept 2023 03:01 pm

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