
सवाईमाधोपुर.किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी होती है, लेकिन विभाग की नजरों में सिर्फ बाढ़ या अतिवृष्टि ही आपदा है। बरसात के तीन माह के दौरान नियंत्रण कक्ष की स्थापना की जाती है, वहीं आवश्यक संसाधन एवं स्टाफ का भी प्रावधान किया जाता है, लेकिन हकीकत है कि तीन माह के दौरान बाढ़ राहत के नाम पर की जाने वाली व्यवस्थाएं भी कोरी खानापूर्ति ही होती हैं। इन तीन माह के अलावा जिले में कहीं भी आग लग जाए या लोगों पर अन्य आफत टूट पड़े तो उसे आपदा नहीं माना जाता है।
खासतौर से आग लगने की घटना पर आपदा विभाग खुद नगर निकायों के भरोसे रहता है। आग लगने की घटना होने पर आपदा प्रबंधन विभाग के पास सवाईमाधोपुर या गंगापुरसिटी नगर परिषद की दमकलों का मुंह ताकने से ज्यादा कुछ नहीं कर पाता है। जिला प्रशासन के अधिकारियों का तर्क गले नहीं उतरता कि बारिश के दौरान कहीं भी पानी भरने से आपदा आ सकती है, जबकि आग लगने या अन्य कोई आपदा एक निश्चित जगह ही आती है। इसके चलते बारिश में ही विशेष इंतजाम किए जाते हैं।
आपदा प्रबंधन कार्यालय में तीन पारियों में 8-8 घंटे की शिफ्ट में दो तैराक, एक लाइटमैन, एक चालक तथा होमगार्ड के जवान रहते हैं। वर्तमान में आपदा प्रबंधन में ट्यूब, लाइफ जैकेट, स्ट्रेचर, दो ड्रेगन टॉर्च, आठ हेलमेट तथा दो जोड़ी जूते ही हैं। अधिकारियों की अनदेखी के चलते आपदा प्रबंध केन्द्र पर हर समय पूरा स्टाफ नहीं रहता है। यह इक्के-दुक्के कर्मचारी ही मिलते है।
क्या है कार्य
आपदा प्रबंधन के तहत आपदा वाले क्षेत्र में तुरंत राहत पहुंचाकर लोगों को बचाना है। आपदा से प्रभावित हुई बिजली, पेयजल उपलब्धता, सड़क मरम्मत आदि के कार्य विभिन्न विभागों के सहयोग से किए जाते हैं। बाढ़ का आकलन कर जिले से प्राप्त रिपोर्ट को मुआवजे के लिए राज्य सरकार को भिजवाना है।
तीन माह, 21 लाख
आपदा प्रबंधन पर प्रतिमाह सात लाख रुपए खर्च होते हैं। यह बजट होमगार्ड पर खर्च किया जाता है। आपदा प्रबंधन में जुलाई से सितम्बर तक के लिए करीब 24 होमगार्ड लगा रखे हैं, जबकि अन्य व्यवस्थाओं के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग, जलदाय, विद्युत, चिकित्सा, पुलिस को जिम्मदारी दी जाती है। ऐसे में वे अपने स्तर पर सुविधा मुहैया कराते हैं।
इन संसाधनों की जरूरत
जिला मुख्यालय स्थित आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष कार्यालय में फस्र्ट एड बॉक्स, इमरजेंसी लाइट, पब्लिक एडे्रस सिस्टम, फेस मास्क, स्ट्रेचर, कम्बल, रबर ट्यूब, चैनपुली, लाइट एक्स, हैण्डक्लॉज, सेफ्टी नेट, हैण्ड टूल सेट, हैवी चैन विद लॉक, अग्निशमन यंत्र, फावड़े, लाइफ जैकेट, टॉर्च पीतल की, लाइफ लाइन रोप, पीपीसी शूज, ड्रेगेन लाइट, डिजीटल कैमरा, फ्लेट बॉटम, एल्युमिनियम बोट, इन्फ्लेटेबल बोट, मड पंप 6, 12 व 26 एचपी के अलग-अलग, सीमेंट बैग, प्लास्टिक जूट, बांस, हैण्ड वायरलैस सिस्टम, जाल, रस्से, बाल्टियां, गैंती, व्हीलवेरोज, कन्टेनर, डस्टबीन, डीडीटी, फिनाइल, जनरेटर पंपसेट, मिट्टी के कट्टे 500, जेसीबी, ट्रैक्टर, अग्निशमन वाहन आदि की जरूरत होती है।
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आपदा प्रबंधन की मॉनिटरिंग जिला प्रशासन की ओर से की जाती है। आपदा से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध है। यहां पर एनडीआरएफ व डीआरएफ आदि टीमें है। आपदा प्रबंधन कार्यालय में स्टाफ नदारद रहने के बारे में जानकारी नहीं है।
भगवत सिंह देवल, अतिरिक्त जिला कलक्टर
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