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Vande Bharat Sleeper Train: 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में यात्रियों को मिलेंगी होटल जैसी सुविधाएं, क्या है सबसे खास?

vande bharat sleeper train भारतीय रेलवे ने 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू करने की बड़ी योजना बनाई है। इन्हें चरणबद्ध तरीके से लॉन्च किया जाएगा। अभी दो ट्रेनें हावड़ा-कामाख्या रूट पर चल रही हैं, जिनका उद्घाटन PM मोदी ने 17 जनवरी 2026 को किया था।

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भारत

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Mukul Kumar

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सक्षम अग्रवाल

Feb 07, 2026

260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने की तैयारी। (फोटो- IANS)

भारतीय रेलवे ने 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है। इन ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके से यात्रियों के लिए शुरू किया जाएगा।

फिलहाल दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें हावड़ा-कामाख्या रूट पर पहले से चल रही हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जनवरी 2026 को हरी झंडी दिखाई थी।

ये ट्रेनें लंबी दूरी की यात्रा के लिए डिजाइन की गई हैं और यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ तेज और आरामदायक सफर का अनुभव देती हैं।

क्या है खास?

  • ट्रेनों में 'कवच' ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है, जो टक्कर को रोकने में सहायक है।
  • ट्रेनें 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं, आमतौर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की योजना हैं।
  • हर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में 16 एसी डिब्बे हैं। 11 थ्री-टियर एसी, 4 टू-टियर एसी और 1 फर्स्ट क्लास एसी की व्यवस्था है।
  • एक ट्रेन में कुल 823 यात्री बैठ सकते हैं।
  • जर्क-फ्री सेमी परमानेंट कपलर और एंटी क्लाइंबर्स, जो झटकों को कम कर सफर को आरामदायक बनाते हैं।
  • आग से सुरक्षा के लिए सभी डिब्बों और शौचालयों में खास दरवाजे और फायर बैरियर लगे हैं।
  • दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष शौचालय की सुविधा है।
  • कोचों के बीच चलने के लिए ज्यादा चौड़ी है।

रूट और किराया

हावड़ा से कामाख्या के बीच 972 किलोमीटर की दूरी में चल रही यह ट्रेन सिर्फ 14 घंटे में सफर तय करती है, जबकि पुरानी ट्रेनें इसी रूट के लिए 16 घंटे से ज्यादा समय लेती हैं।

किराये की बात करें तो हावड़ा से कामाख्या तक थ्री-टियर एसी में 2,299 रुपये, टू-टियर एसी में 2,966 रुपये और फर्स्ट क्लास में 3,640 रुपये लगेंगे।

इसके अलावा 5 फीसदी जीएसटी अलग से देना होगा। यह किराया राजधानी एक्सप्रेस से थोड़ा ज्यादा है लेकिन सुविधाएं और तेज रफ्तार इसे खास बनाती हैं।

इन ट्रेनों में आरएसी या वेटिंग टिकट नहीं मिलेगा, सिर्फ रिजर्व्ड सीट का टिकट ही बुक हो सकता है। इन ट्रेनों का निर्माण भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) और चेन्नई की कोच फैक्ट्री में हो रहा है।

ये हैं लग्जरी सुविधाएं

  • निजी केबिन - स्लाइडिंग दरवाजों वाले विशाल कम्पार्टमेंट जो परिवार और बिज़नेस यात्रियों के लिए उपयुक्त हैं।
  • प्रीमियम बर्थ - मेमोरी फोम गद्दे, एम्बिएंट लाइटिंग और यूएसबी चार्जिंग पोर्ट के साथ रिक्लाइनिंग बेड।
  • शॉवर सुविधा - फर्स्ट एसी यात्रियों के लिए लंबी यात्रा में नहाने की व्यवस्था।
  • स्मार्ट कंट्रोल - लाइटिंग, तापमान और सर्विस के लिए टच पैनल और बेहतर साउंडप्रूफिंग।
  • वाई-फाई और मनोरंजन - हाई-स्पीड इंटरनेट, पर्सनल स्क्रीन और हर बर्थ पर कंटेंट उपलब्ध।
  • आधुनिक डिजाइन - वुड-फिनिश पैनल, एलईडी मूड लाइटिंग और मिनिमलिस्ट इंटीरियर।​​​​​​​​​​​​​​​​

नेपाल-बांग्लादेश सीमा के पास वाले इलाकों में अब पहचान पत्र जरूरी

रेलवे बोर्ड ने बुधवार को एक आदेश जारी किया है जिसके मुताबिक नेपाल और बांग्लादेश की सीमा से लगे इलाकों में आरक्षित ट्रेनों में यात्रा करने के लिए फोटो वाला पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य है।

इस नियम के अनुसार कम से कम एक यात्री के पास असली फोटो पहचान पत्र होना जरूरी है, नहीं तो सभी यात्रियों को बिना टिकट माना जा सकता है।

यह नियम सुरक्षा बढ़ाने के लिए लागू किया गया है। भारत और बांग्लादेश के बीच पांच रेल जोड़ हैं और नेपाल के साथ जयनगर-कुर्था तथा रक्सौल-सिरसिया जैसे रेल कनेक्शन हैं।

इन रूटों पर विशेष चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं जो यात्रियों की जानकारी वेरिफाई करते हैं और सीमा पार होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकते हैं।

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