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सवाई माधोपुर

रणथम्भौर: आखिर टूटी उच्च अधिकारियों व सरकार की नींद

उपवन संरक्षक पर गिरी गाज, किया एपीओ

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सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर बाघ परियोजना की फलौदी रेंज के टोडरा वन क्षेत्र में बा?घिन टी 114 एवं उसके एक शावक की मौत के मामले में आखिर सरकार की तंद्रा टूट गई है। राज्य सरकार ने आदेश जारी कर रणथम्भौर बाघ परियोजना के उप वन संरक्षक संग्राम सिंह कटियार को एपीओ कर दिया गया। माना जा रहा है कि बाघिन टी 114 एवं उसके एक शावक की मॉनिटरिंग में विभागीय स्तर पर लापरवाही की गई है। इसको लेकर मीडिया में राज्य सरकार की जमकर किरकिरी हो रही थी। वहीं वन विभाग के बाघ संरक्षण को लेकिर किए जा रहे प्रबंधन पर भी सवाल खड़े हो रहे थे। इसके चलते उपवन संरक्षक पर गाज गिरी है।
किसी का भी पदस्थापन नहीं
उप वन संरक्षक संग्राम सिंह कटियार के स्थान पर किसको लगाया गया है। इसके बारे में संयुक्त शासन सचिव कार्मिक विभाग की ओर से अभी आदेशों में कोई खुलासा नहीं किया गया है। फिलहाल पद रिक्त ही रखा गया है। इस संबंध में संयुक्त शासन सचिव देवन्द्र कुमार की ओर से आदेश जारी किए गए हैं।
लगातार खड़े हो रहे थे सवाल
उपवन संरक्षक की कार्यप्रणाली शुरू से ही विवादों में रही थी उनके कार्यकाल में बाघिनव शावक की मौत के मामले के साथ ही पूर्व में बाघ टी-57 की मौत में भी वन विभाग पर लापरवाही के आरोप लगे थे। वन विभाग की ओर से कई दिनों तक बाघ की तबियत खराब होने के बाद भी वन विभाग की ओर से बाघ के उपचार के कोई खास प्रबंध नहीं किए गए थे। इसकी कीमत बाघ को जान देकर चुकानी पड़ी थी। इसके बाद ईडीसी गाइड भर्ती के मामले में भी वन अधिकारियों पर लापरवाही व मनमानी के आरोप लगे थे और इसकों लेकर वनकर्मियों में रोष बना हुआ था। वहीं खण्डार रेंज में सांभर के शिकार का मामला भी सामने आया था।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
राजस्थान पत्रिका की ओर से रणथम्भौर मेंं हो रही अनियमिता और लगातार हो रही बाघों की मौत के मामले में राजस्थान पत्रिका की ओर से लगातार शृंखलाबद्ध समाचार प्रकाशित कर वन विभाग की उदासीनता व अधिकारियों की लापरवाही को उजागर किया था। इसके बाद हरकत में आई सरकार ने अब उपवन संरक्षक के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
संजीव शर्मा बन सकते हैं उपवन संरक्षक
रणथम्भौर में पूर्व में सहायक वन संरक्षक रहे संजीव शर्मा को फिर से डीएफओ के पद पर लगाया जा सकता है। इसको लेकर लोग कयास भी लगा रहे हैं। हालांकि वे वर्तमान में रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में लगे हुए हैं। उनको रणथम्भौर में काम करने का लंबा अनुभव भी है। हालांकि अब तक वन विभाग की ओर से इस संबंध में पुष्टि नहीं की गई है।

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