सवाईमाधोपुर. चौथ का बरवाड़ा के पास सामाजिक वानिकी के अधीन सारसोप के वन क्षेत्र में नीलगाय के शिकार के मामले में नया खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार चौथ का बरवाड़ा से लेकर बौंली तक के वनक्षेत्र में पिछले करीब छ माह से पुलिस को वन्यजीवों के अवशेष मिल रहे थे। ऐसे में मंगलवार को चौथ का बरवाड़ा पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए शिकारियों के कई और वन्यजीवों के शिकार की वारदातों को अंजाम देने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अब तक वन विभाग की ओर से इस संबंध में पुष्टि नहीं की जा रही है लेकिन सूत्रों की माने तो उक्त क्षेत्र में शिकारी कई दिनों से लगातार सक्रिय थे और उनके द्वारा कई और वन्यजीवों के शिकार करने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल वन विभाग की ओर से आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ पूरीहोने और मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तीन नीलगायों का किया था शिकार
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार जब सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो पुलिस की टीम को देखकर आरोपी मौके से भागने लगे। इनमें से पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया जबकि दो अन्य आरोपी मौके से फरारहो गए। अब वन विभाग की टीम गिरफ्तार किए गए आरोपियों से अन्य आरोपियों के संबंध में पूछताछ कर रही है। गौरतलब है कि पुलिस ने आरोपियोंं के पास से जो जीप जप्त की गई थीउसमें तीन नीलगायों के शव मिले थे। ऐसे में आरोपियों द्वारा तीन नीलगायों के शिकार करने की आशंका जताई जा रही है।
बौंली थाने में भी दर्ज कराया था मामला
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार करीब एक सप्ताह पूर्व भीवन विभाग के कार्मिकों की ओर से बौंली थाने में जप्त की गई जीप में ही सवार लोगों पर वन्यजीव का शिकार करने का मामला दर्ज कराया था। अब वन विभाग भी मामले में किसीबड़े गिरोह का हाथ होने की आशंका जता रहा है।
वन विभाग पर खड़े हो रहे सवाल
पुलिस के अनुसार संबंधित गिरोह कई माह से सारसोप वउसके आसपास के जंगलों में वन्यजीवों के शिकार की वारदातों को अंजाम दे रहा था। लगातार कई माह से जंगल में वन्यजीवों के अवशेष मिलने के बाद भी वन विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इतना ही नहीं करीब एक सप्ताह पहले बौंली थाने में वन्यजीव के शिकार का मामला दर्ज कराने के बाद भी वन विभाग की ओर से शिकारियों की धरपकड़ के लिए कोई खास प्रयास नहीं किए गए। ऐसे में अब एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली और मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े हो रहे हैं।