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सवाईमाधोपुर में बदला निकाय चुनाव का समीकरण: OBC के खाते में गई सभापति की कुर्सी, देखें बाकी सीटों का हाल

Rajasthan Nikay Chunav: सवाई माधोपुर निकाय चुनाव के लिए आरक्षण की स्थिति साफ हो गई है। सवाई माधोपुर और बौंली में ओबीसी, खण्डार व वजीरपुर में एससी और बामनवास में एसटी वर्ग का अध्यक्ष बनेगा।
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सवाई माधोपुर

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Harshita Saini

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Updated: 14 Aug 2026, 12:40 PM IST

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सवाईमाधोपुर नगर परिषद कार्यालय भवन (Photo-Patrika)

सवाईमाधोपुर. प्रदेश में नगर निकाय चुनावों के लिए गुरुवार को निकाली गई लॉटरी ने जिले की राजनीति का समीकरण बदल दिया है। नगर परिषदों और नगरपालिकाओं के अध्यक्ष पदों के आरक्षण की घोषणा के बाद अब सवाईमाधोपुर नगर परिषद का सभापति पद ओबीसी वर्ग के लिए सुरक्षित हो गया है। इसी क्रम में बौंली का पद भी ओबीसी वर्ग को मिला है, जबकि खण्डार और वजीरपुर नगरपालिकाओं के अध्यक्ष पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं बामनवास नगरपालिका का अध्यक्ष पद एसटी वर्ग के लिए तय हुआ है।

पिछली बार कांग्रेस का था बोर्ड

सवाईमाधोपुर नगर परिषद का सभापति पद पिछले बार एससी वर्ग के लिए सुरक्षित था। कांग्रेस का बोर्ड बना और विमल चंद महावर सभापति चुने गए। सभापति महावर रिश्वत लेते हुए ट्रैप हो गए थे। इस घटना ने पूरे जिले की राजनीति को हिला दिया। राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था और नगर परिषद अचानक अस्थिरता के दौर में पहुंच गई।

कार्यवाहक सभापति की होती रही नियुक्तियां

महावर के निलंबन के बाद राज्य सरकार ने कार्यवाहक सभापति नियुक्त किए। बोर्ड की समाप्ति तक यहां सुनील तिलकर कार्यवाहक सभापति रहे। उन्होंने परिषद की जिम्मेदारी संभाली और प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन अस्थिरता का असर पूरे कार्यकाल में बना रहा।

फैक्ट फाइल

  • निकाय का नाम- सवाईमाधोपुर नगरपरिषद
  • कुल वार्ड- 60
  • कुल मतदाता- 91 हजार 897
  • पुरुष मतदाता- 44 हजार 284
  • महिला मतदाता- 47 हजार 609
  • ट्रांसजेंडर- 4
  • कुल मतदान केंद्र- 94

चार पालिकायों में पहली बार बिछेगी चुनावी चौसर

जिले की खण्डार, बौंली, बामनवास और वजीरपुर नगरपालिकाओं में पहली बार चेयरमैन की कुर्सी पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि बैठेगा। नगर पालिका गठन के बाद पहली बार होने जा रहे चुनावों ने चारों क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। अध्यक्ष पद के साथ वार्ड पार्षद और उपाध्यक्ष पद के लिए भी दावेदार सक्रिय हो गए हैं। पहली बार पालिका चुनाव होने के कारण भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के सामने बोर्ड बनाने की चुनौती है।

दलों ने संभावित प्रत्याशियों की तलाश और वार्डवार समीकरणों पर मंथन शुरू कर दिया है। वहीं दावेदार भी टिकट हासिल करने के लिए पार्टी नेताओं से संपर्क साधने के साथ अपने-अपने समर्थकों को लामबंद करने में जुटे हैं। चारों पालिकाओं में वार्डों का गणित और स्थानीय सामाजिक समीकरण चुनाव की दिशा तय करेंगे। ऐसे में राजनीतिक दल मजबूत प्रत्याशियों के चयन के साथ संभावित निर्दलीय उम्मीदवारों और उनके प्रभाव का भी आकलन कर रहे हैं। चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही बैठकों, संपर्क और अंदरूनी रणनीति का दौर शुरू हो गया है। पहली बार होने वाले चुनाव में मतदाताओं के सामने भी नया अनुभव होगा। अब देखना यह होगा कि चारों पालिकाओं में जनता किसे अपना पहला चेयरमैन चुनती है और किस राजनीतिक दल को पहली बार बोर्ड बनाने का गौरव मिलता है।

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