सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर बाघ परियोजना में बाघों का कुनबा बढऩे के साथ ही बाघों के लिए विचरण क्षेत्र कम पड ऱहा है और बाघ टेरेटरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। रणथम्भौर काबाघ टी-38 भी लगातार इलाके की तलाश कर रहा है। करीब दस साल तक मध्यप्रदेश के जंगलोंं में रहने के बाद वापस रणथम्भौर आए बाघ कोअब तक इलाका नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में यहबाघइलाके की तलाश में लगातार इधरउधर भटक रहा है। वर्तमान में बाघ का मूवमेंट खण्डार रेंज केकिला इलाके ूमें बताया जा रहा है।
चार रेंजों का किया भ्रमण
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एमपी से वापस रणथम्भौर लौटने के बाद से ही बाघ लगातार इलाके की तलाश में जुटा हुआ है। एमपी से आने केबाद बाघ ने पहले खण्डार और इसके बाद कुण्डेरा व तालेडा और बालेर रेंज का रुख किया। इसके बाद कई दिनों तक बाघ करौली के कैलादेवी अभयारण्य वन क्षेत्र कीओर भी विचरण किया।
कैमरे में कैद हुई फोटो
वन अधिकारियों ने बताया कि बाघ अब एक बार फिर से खण्डार रेंज में आ गया है। बाघ का मूवमेंट खण्डार रेंज के तारागढ़ दुर्ग क्षेत्र में बना हुआ है। वन विभाग की ओर से लगाए गए सीसीटीवी कैमरों में भीबाघ की फोटो कैद हुई है।वन विभाग कीओर सेबाघ की मॉनिटरिंग कराई जा रही है।
इनका कहना है…
पूर्व में बाघ का मूवमेंट बालेर रेंज व करौली कीओर था लेकिन अब एक बार फिर बाघ टी-38 खण्डार रेंज में आ गया है। बाघ फोटो ट्रैप कैमरों में भी कैद हुआ है।
– विष्णु गुप्ता, क्षेत्रीय वनअधिकारी, खण्डार।