सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर में आखिरकार रविवार को टारगेट टी-113 पूरा हो गया। वन विभाग को तालेड़ा वन क्षेत्र में बाघ की साइटिंग होनेके बाद वन विभाग की टीम ने बाघ को टेकुंलाइज किया। इसके बाद सड़क मार्ग से बाघ को अलवर के सरिस्का के लिए रवाना किया गया। इस दौरान रणथम्भौर बाघ परियोजना के सीसीएफ सेडूराम यादव सरिस्का के फील्ड डायरेक्टर आरएन मीणा, रणथम्भौर बाघ परियोजना के उपवन संरक्षक संग्राम सिंह, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक संजीव शर्मा, रणथम्भौर की रेस्क्यू टीम प्रभारी राजवीर सिंह, जसकरण मीणा आदि मौजूद थे।
दो दिनों से चल रही थी मशक्कत
वन विभाग की ओर से पूर्व में नेशनल टाइगर कनजर्वेशन अथोरियटी (एनटीसीए) की ओर से सरिस्का व मुकुंदरा में बाघों को शिफ़्ट करने की अनुमति देने के बाद पिछले करीब एक सप्ताह से वन विभाग की ओर से शिफ्टिंग की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए वन विभाग की ओर से चार बाघों को चिह्नित किया गया था। विभाग की टीम दो दिनोंं से लगातार जंगल में बाघों को टे्रस करने ेके लिए प्रयास कर रही थी रविवार को भी टीम ने देर शाम तक प्रयास किया था लेकिन टीम को सफलता नहीं मिल सकी थी। इसके बाद सोमवार को वन विभागको बाघ को टे्रकुंलाइज करने में सफलता मिली। वन विभाग की टीम ने छोलादह और बेड़ा कुई के बीच स्थित वन क्षेत्र में ट्रेंकुलाइज किया।
पहली बार 2008 में सरिस्का भेजा गया था बाघ
रणथम्भौर से अन्य टाइगर रिजर्व में बाघ शिफ्ट करने का पहला कार्य साल 2008 में हुआ था। उस वक्त बाघ विहीन हो चुके अलवर जिले के सरिस्का टाइगर रिजर्व में रणथम्भौर से पहला बाघ भेजा गया था, जिसे रणथम्भौर में दारा के नाम से जाना जाता था। इसके बाद साल 2009 में एक साथ पांच बाघों को रणथम्भौर से सरिस्का भेजा गया। साल 2010 में एक साथ दो बाघ रणथम्भौर से एक बार फिर सरिस्का भेजे गए। रणथम्भौर से सरिस्का कुल 8 बाघ बाघिनों को शिफ्ट किया जा चुका है। जिसमें टी.1, टी.7, टी.10, टी.12, टी.18, टी.44, टी.51 और टी.52 शामिल है।आखिरी बार 2018 में रणथम्भौर से बाघ टी-75 को सरिस्का भेजा गया था। हालांकि दो माह बाद ही सरिस्का में बाघ टी-75 की मौत हो गई।
ुमुकुंदरा व उदयपुर भी भेजे जा चुके है बाघ-बाघिन
इसी तरह मुकुंदरा में भी अप्रेल 2018 में रणथम्भौर से पहला बाघ टी.91 शिफ्ट किया गया। उसके बाद तीन दिन पूर्व 18 दिसम्बर 2018 को बाघिन टी.106 को शिफ्ट किया गया। इसके बाद रणथम्भौर की बाघिन लाइटनिंग को भी मुकुंदरा में शिफ्ट किया गया। हालांकि बाद में मुकुंदरामें अधिकतर बाघ बाघिनों की या तो मौत हो गई या फिर वे लापता हो गए। वही रणथंभौर का एक बाघ टी.24 उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में भी भेजा गया है।
यूं चला घटना क्रम
7.00 बजे जंगल में पहुंची वन विभाग की टीम
7.20 के करीब वनविभाग की टीम ने टे्रकिंग की शुरू
4 घंटे लगातार ढूंढने के बाद भी नहीं मिली सफलता
11.30 पर टीम ने तालेडा वन क्षेत्र में किया लंच
12.00 बजे के बाद फिर शुरू हुई तलाश
4.38 के करीब वन विभाग की टीम ने बाघ को किया टे्रकुंलाइज
25 मिनट तक बाघ का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
5.40 बजे केकरीब बाघ को सड़क मार्ग से सरिस्का के लिए किया गया रवाना।
इनका कहना है….
बाघ टी-113 को तालेडा से टे्रकुंलाइज कर सरिस्का रवाना किया गया है। जहां तक मुकुंदरा शिफ्टिंग का सवाल है तो यह अभी बाद की बात है।
– सेडुराम यादव, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।