सवाईमाधोपुर. वन विभाग व सरकार की ओर से जारी किए गएआदेश अब वन विभाग के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। पूर्व में सरकार की ओर से मार्च 2015 में रणथम्भौर,सरिस्का, कुभलगढ़ व जवई अभयारण्य में कनवर्जन मामलों में रोक लगाई थी बाद में 2021 में सरिस्का में छूट दे गई ऐसे में दो टाइगर रिजर्व जहां एक में 500 मीटर की परिधि में आवासीय निर्माण की अनुमति और एक में रोक का प्रावधान होने के कारण वन विभाग को भी परेशसानी हो रही है। हाल ही में वन विभाग की ओर सरिस्का के फैंसले को आधार मानते हुए रणथम्भौर में क्रिटिकल टाइगर हैबिटाट(सीटीएच) की पांच मीटर की परिधि में आवासीय निर्माण के लिए लैण्ड कनवर्जन की छूट दी गई थी। इसका रणथम्भौर में विरोध शुरू हुआ तो वन विभाग की ओर से एनओसी वापस ले ली गई।
सीटीएच में 500 मीटर की परिधि में आवासीय निर्माण की छूट
वन अधिकारियों ने बताया कि 2015 में जारी किए गए आदेशों के तहत टाइगर रिजर्व मेंं क्रिटिकल टाइगर हैबिटाट (सीटीएच) में 500 मीटर की परिधि में आवासीय निर्माण या फार्म हाउस के निर्माण पर रोक नहीं है इसके लिए अनुमति दी जा सकती है। गौरतलब है कि रणथम्भौर को2008 में ही सीटीएच घोषित किया जाचुका है।
वन विभाग के ईको सेंसेटिव जोन के ड्रॉफ्ट में भी इसका उल्लेख
पूर्व में हाई कोर्ट की ओर से वन विभाग को 15 अगस्त तक रणथम्भौर बाघ परियोजना का ईको सेंसेटिव जोन घोषित करने के आदेश जारी किए गए थे और वन विभाग द्वारा ईको सेंसेटिव जोन घोषित किए जाने तक रणथम्भौर बाघ परियोजना के एक किमी के एरिया को ईको सेंसेटिव जोन घोषित करने के आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद वन विभाग की ओर से रणथम्भौर बाघ परियोजना में ईको सेंसेटिव जोन के लिए तीन अलग- अलग श्रेणियां निर्धारित की गई थी। साथ ही वन विभाग की ओर से तैयार किए गए ड्रॉफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया था कि बाघ परियोजना के एक किमी के इलाके में पूर्व में किए जा चुके निर्माण को यथावत रखा जाएगा। साथ ही ड्रॉफ्ट में आवासीय निर्माण के लिए छूट का प्रावधान भी किया गया था। हालांकि अभी इस ड्रॉफ्ट को मिनिस्ट्री ऑफ इनवायरमेंट एण्ड फोरेस्ट(मॉफ) को भेजा गया है इसे अभी तक हरी इण्डी नहीं मिली है।
सरकार से मांगा मार्गदर्शन
वन अधिकारियों ने बताया कि यूं तो सीटीएच में पांच सौ मीटर की परिधि में आवासीय निर्माण या फार्म हाउस के निर्माण पर रोक नहीं है। ऐसे में निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन उच्च अधिकारियों ने रणथम्भौर की संवेदनशीलता और वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए मामले में सरकार से मार्गदर्शन लेने के निर्देश दिए है ऐसे में फिलहाल एनओसी पर रोक लगाई गई है और मामले को सरकार को भेजा गया है। सरकार की ओर से निर्देश मिलने के बाद ही अब आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इनका कहना है…
2015 के आदेश के तहत सीटीएच के 500 मीटर की परिधि में आवासीयव फार्म हाउस के निर्माण पर रोक नहीं है लेकिन रणथम्भौर के लिए सरकार से विशेष मार्गदर्शन मांगा गया है। तब तक एनओसी पर रोक लगाई गई है। सरकार कीओर से मार्गदर्शन मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
– संग्राम सिंह, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना,सवाईमाधोपुर।
पूर्व में वन विभाग की ओर से एक फाइल को पांच सौ मीटर में आवासीय व फार्म हाउस निर्माण के लिए अनुमति जारी की थी। इस निर्णय के बाद 25 फाइले आई थी लेकिन अब वन विभाग की ओर से एनओसी को वापस लेने से मामला अटक गया है।
– कपिल शर्मा, उपखण्ड अधिकारी, सवाईमाधोपुर।