
सवाईमाधोपुर में सीमेंट फैक्ट्री जाने वाले मार्ग पर स्थित गुलाब बाग।
सवाईमाधोपुर.कभी सवाईमाधोपुर की शान कहा जाने वाला गुलाब बाग वर्तमान में प्रशासनिक अनदेखी के चलते अपने मूल अस्तित्व को जूझ रहा है। हालांकि नगर परिषद की और से कुछ साल पहले गुलाब बाग का सौंदर्यीकरण का कार्य तो करवा दिया गया है लेकिन अब तक यहां पहले की तरह गुलाब की खेती औऱ महक विकसित नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि बजरिया से सीमेंट फैक्ट्री जाने वाले मार्ग पर स्थित गुलाब बाग में आज से करीब 45 साल पहले देशी-विदेशी गुलाब की खेती की जाती थी। इस दौरान गुलाब की महक से आसपास का वातावरण महकता रहता था, पर अब यहां न तो गुलाब के पौधे है और न ही बाग में हरियाली। यह हालात लंबे समय से बने हुए है।
पहले होती थी डच रोज की खेती
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत कुछ साल पहले उद्यानिकी विभाग ने जिले में डच रोज की खेती से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने व व्यवसाय से जोडऩे के लिए ग्रीन हाउस पद्धति शुरू की थी। इसके तहत गुलाब दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता आदि शहरों तक भिजवाए जाने लगे, लेकिन बाद में किसानों व सरकार का रुझान कम होने से ग्रीन हाउस पद्धति भी बंद सी हो गई। स्थिति यह है कि अब यहां कोटा व जयपुर से गुलाब मंगाए जा रहे हैं।
जानकारी का अभाव
गुलाब की खेती में आर्थिक लाभ तो है लेकिन जानकारी के अभाव व अनुकूल तापमान नहीं मिलने के कारण किसानों का रूझान कम हो गया है। ग्रीन हाउस पद्धति की तकनीक के बारे में भी जानकारी नहीं होने के कारण किसानों को इस पद्धति से लाभ नहीं मिल पाया। वर्तमान में गुलाब की जगह जरबेरा के महकदार फूलों की खेती की जा रही है। जरबेरा के फूलों की कोटा व जयपुर में बढ़ती मांग को देखते हुए किसान इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त अधिक मुनाफे के लिए गंगापुरसिटी में किसान फूलों के स्थान पर खीरे की खेती भी कर रहे है।
इनका कहना है...
गुलाब की खेती में आर्थिक लाभ, मांग व अनुकूल वातावरण नहीं मिलने के कारण किसानों ने गुलाब की पैदावार करना बंद कर दिया। वर्तमान में जरबेरा के फूलों की मांग अधिक होने के कारण उसकी खेती की जा रही है।
रामराज मीणा, सहायक निदेशक, उद्यान विभाग सवाईमाधोपुर
Published on:
07 Feb 2021 08:49 pm
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