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जान लेवा बने बिना मुंडेर के कुएं

चौथकाबरवाड़ा. ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मुंडेर के कुए जानलेवा साबित हो रहे हैं। इन्हें ढंकने के निर्देशों का स्थानीय प्रशासन पर कोई असर नहीं हो रहा। एक समय में बीच गांवों में बने पनघट के कुएं मुख्य स्थान माने जाते थे।

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Thorns on the roadside wells in Banjarii.

Thorns on the roadside wells in Banjarii.

चौथकाबरवाड़ा. ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मुंडेर के कुए जानलेवा साबित हो रहे हैं। इन्हें ढंकने के निर्देशों का स्थानीय प्रशासन पर कोई असर नहीं हो रहा। एक समय में बीच गांवों में बने पनघट के कुएं मुख्य स्थान माने जाते थे। गत एक दशक में नलकूप का प्रचलन बढऩे के बाद कुओं में जल स्तर कम हो गया। इसमें कुएं केवल एक गहरे गड्ढ़े के रूप में रह गए। कुछ गांवों में तो इन कुओं में कचरा डाला जा रहा है। बिनजारी पंचायत मुख्यालय पर रास्ते के किनारे बने ऐसे ही पुराने कुएं में एक गाय और सांड़ गिरा था। जिसे घंटों मशक्कत के बाहर निकला जा सका था। आंधोली गांव में भी एक सांड कुएं में गिरा था। ग्रामीणों के अनुसार बिना मुण्डेर वाले कुओं में सियार, हिरण जैसे जंगली जानवर गिरने की कई घटनाएं हो चुकी। बिनजारी में दो मवेशी गिरने के बाद उपजिला मजिस्ट्रेट रघुनाथ खटीक ने पंचायत को ऐसे कुओं पर जाल लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक पखवाड़े बाद भी निर्देशों पर अमल नहीं हुआ। फिलहाल इसे कांटे डालकर ढंक रखा है।

कर रहे है कार्रवाई-

ग्राम पंचायत ने बिना मुण्डेर के कुए को ढंकने के लिए जाल बनवाया है। इसे जल्दी ही लगाया जाएगा।

रजाक मोहम्मद सचिव ग्राम पंचायत बिनंजारी