
सवाईमाधोपुर में संचालित डीईओ माध्यमिक कार्यालय।
सवाईमाधोपुर. माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने भले ही 9 मई को प्रदेशभर के संस्था प्रधानों को आदेश देकर गांव के सार्वजनिक स्थानों पर बाल सभाएं करने के आदेश जारी कर दिए हैं लेकिन इस आदेश ने संस्था प्रधानों के सामने संकट भी खड़ा कर दिया है।
ये सभी बाल सभा गांव के सार्वजनिक स्थानों पर होगी और इनमें छाया के लिए टेंट, कुर्सियां, टेबल, बच्चों को बैठाने के लिए चटाई, ट्रांसपोर्ट आदि की व्यवस्था पर होने वाले खर्च के लिए एक रुपए का बजट नहीं दिया है। ऐसे में सभा में आने वाले अभिभावको, जनप्रतिनिधियों व अन्य समुदाय के बैठने के लिए टेबल-कुर्सियां के साथ टेंट की व्यवस्था भी करनी होगी और प्रचंड गर्मी में पेयजल की व्यवस्था भी। इनमें जिले राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कुल एक हजार विद्यालयों में बालसभाएं होगी।
महीने में तीन बार होगी बाल सभा
राज्य की सरकारी स्कूलों में प्रत्येक शनिवार को होने वाली नियमित बालसभा अब माह में तीन बार अयोजित की जाएगी। एक बालसभा माह में पडऩे वाली अमावस्या को होगी, जबकि अन्य दो बालसभा अमावस्या के आगे-पीछे आने वाले शनिवार को छोड़ते हुए अन्य शनिवार को की जाएगी।
शिक्षा विभाग को बदलने ही पड़े आदेश
शिक्षा विभाग बाल सभा को लेकर अपने ही आदेशों में उलझता हुए जा रहा हैं। शिक्षकों के विरोध के बाद मानदेय पर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित अन्य कार्मिकों को प्रधानाचार्यो की मॉनिटरिंग के लिए अधिकारी बनाने के आदेशों की भाषा विभाग ने बदल दी है। इससे पहले गांव के चौपाल पर परीक्षा परिणाम सार्वजनिक करने के बाद माध्यमिक निदेशक बीकानेर को वापस संशोधित आदेश निकालने पड़े थे।
इनका कहना है
बाल सभाओं पर होने वाले खर्चे के लिए कोई बजट नहीं दिया है। संस्था प्रधान अपने स्तर पर या जन सहयोग से ही व्यवस्थाएं करनी होगी। नौ मई को स्कूलों में ही परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके बाद सार्वजनिक स्थानों पर बालसभाएं होगी।
मिथलेस शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक, सवाईमाधोपुर
Updated on:
10 May 2019 11:42 am
Published on:
10 May 2019 11:41 am
