सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर का एक बाघ है टी-136 जो पिछले दस माह से टेरेटरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा है। यह बाघ अब तक दो राज्यों, एक टाइगर रिजर्व, तीन अभयारण्यों व पांच जिलोंं के जंगलों की खाक छानकर खानाबदोशों की तरह जिंदगी जी रहा है। लेकिन अब यह बाघ वन विभाग के लिए यह बाघ सिरदर्द बन चुका है। जानकारी के अनुसार यह बाघ टी-136 पिछले डेढ़ माह से वन विभाग की नजरों से ओझल है। यह बाघ ना तो वन विभाग के कार्मिकों को नजर आ रहा है और नहीं फोटो ट्रैप कैमरों में कैद हो रहा है। हालांकि दो राज्यों, एक टाइगर रिजर्व, तीन अभयारण्यों व पांच जिलोंं की वन विभाग की टीम बाघ को टे्रस करने की जुगत में लगी हुई है। लेकिन अब तक टीम को सफलता नहीं मिल सकी है।
आखिरी बार कूनों के पास मिले थे पगमार्क
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आखिरी बार वन विभाग को करीब डेढ़ माह पूर्व एमपी के कूनो अभयारण्य के पास बाघ के पगमार्क मिले थे। जिस जगह पर बाघ के पगमार्क मिले थे वहां से कूनोंं में चीतोंं के लिए बनाए गए एनक्लोजर से महज आठ किमी दूर थी। इसके बाद वन विभाग की ओर से एहतियात के तौर पर मॉनिटरिंग व टे्रकिंग में भी इजाफा किया गया था। हालांकि अब कूनो ेके वनाधिकारियों की माने तो कूनो व उसके आसपास के क्षेत्र में किसी भी बाघ की मौजूदगी नहीं है।
धौलपुर व करौली में भी नहीं हुआ टे्रस
कूनों व उसके आसपास के क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के लम्बे समय से साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बाघ के वापस धौलपुर या करौली के जंगलों की ओर लौटने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन धौलपुर या करौली के जंगलोंं में भी वन विभाग को बाघ टी-136 के लौट आने के सबूत नहीं मिले है। वन अधिकारियों का कहना है कि बाघ के धौलपुर व करौली के जंगलों में कोई ताजा पगमार्क या फोटो कैमरे में कैद नहीं हुए है।
मुरैना के जंगलोंं में हो सकता है मूवमेंट
वन अधिकारियों ने बताया कि बाघ का मूवमेंट फिलहाल कूनो, धौलपुर व करौली के वन क्षेत्र में नहीं है। ऐसे में बाघ के मुरैना के जंगलों में खाक छानने की आशंका जताई जा रही है। गौरतलब है कि पूर्व में गत वर्ष भी यह बाघ कई दिनों तक मुरैना के जंगलों में घमता रहा था। हालांकि इस संबंध में भी अब तक वन विभाग की ओर से पुष्टि नहीं की जा रही है।
यूं रहा टी-136 का सफर
अगस्त 2022 में रणथम्भौर की कुण्डेरा रेंज से निकलकर लालपुर उमरी पहुंचा था।
सितम्बर 2022 में यह बाघ बनास पार कर करौली पहुच गया था।
अक्टूबर 2022 में यह बाघ करौली से धौलपुर पहुंच गया था।
20 अक्टूबर 2022 के आसपास यह बाघ धौलपुर से मुरैना पहुंचा था।
नवम्बर 2022 में यह बाघ मुरैना से वापस धौलपुर लौट आया था।
मई 2023 में यह बाघ चंबल पार कर एमपी के श्योपुर पहुंच गया था।
इनका कहना है…
कूनों में वर्तमान में किसी भी बाघ की मौजूदगी नहीं है। टी-136 वर्तमान में कहां हैइसकी जानकारी नहीं है।
– पीके वर्मा, उपवन संरक्षक, कूनो अभयारण्य, ग्वालियर।
बाघ टी-136 का लास्ट मूवमेंट एमपी में था। करीब डेढ़ माह से धौलपुर के जंगलों में बाघ का मूवमेंट नहीं मिला है।
– सुरेश गुप्ता, उपवन संरक्षक, धौलपुर।
हमारे यहां से तो यह बाघ कई माह पूर्व ही जा चुका है। इसके वापस करौली लौटने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। फिर भी यदि यह बाघ वापस आया है तो एक दो दिनों में कैमरा टै्रप के रिकॉर्ड की जांच कराकर ही कुछ कहा जा सकता है।
– रामानंद भाकर, उपवन संरक्षक, करौली।