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सवाई माधोपुर

कम सीट में ही भ्रमण पर भेजे जा रहे वाहन, गाइड व वाहन मालिक को नहीं मिल रही राशि

पत्रिका एक्सपोज...पर्यटकों को हो रही परेशानी

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सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर पार्क भ्रमण पर जाने वाले पर्यटकों, वाहन मालिकोंं व गाइडों को वन विभाग की मनमानी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल वन विभाग की मनमानी के कारण सुबह व शाम दोनों ही पारियों में भ्रमण पर जाने वाले वाहनों को निर्धारित से कम सीटों पर ही भ्रमण पर भेजा जा रहा है। जबकि विभाग की ओर से गाइडों व वाहन मालिकों को जिप्सी व कैंटर में पर सीट यानि प्रति पर्यटक के अनुसार ही शुल्क का वितरण किया जा रहा है।

बुकिंग कैंसिल होने पर ना तो राशि हो रही रिफंड ना ही गाइड व वाहन मालिक को हो रहा भुगतान
वन विभाग के नियम के अनुसार यदि कोई पर्यटक भ्रमण पर जाने के निर्धारित समय से 45 मिनट पूर्व तक वाहन को रिलीज नहीं कराता है तो विभाग की ओर से बुकिंग को निरस्त कर दिया जाता है। इसके बाद विभाग की ओर से पर्यटकों को राशि भी नहीं लौटाई जाती है और ना ही गाइड व वाहन मालिक को उनके हिस्से की राशि का भुगतान किया जा रहा है। जबकि विभाग की ओर से एडवांस बुकिंग में पर्यटकों से जो राशि ली जाती है उसमें गाइड व वाहन मालिक की राशिभी सम्मिलित रहती है।

अन्य पर्यटकों को भी नहीं किया जा रहा एडजेस्ट
वन विभाग की ओर से एडवांस ऑनलाइन में कुछ पर्यटकों के अंतिम समय पर भ्रमण पर नहीं आने पर विभाग की ओर से जिप्सी व कैंटर को कम ही सीट पर पार्क भ्रमण पर भेजा जा रहा है। जबकि सीट खाली होने पर यदि वन विभाग चाहे तो अन्य पर्यटकों को भी पार्क भस्रमण पर भेजा जा सकता है। इससे जहां एक ओर वन विभाग को अतिरिक्त आय होगी वहीं बिना एडवांस बुकिंग कराए पर्यटकों को भी आसानी से पार्क भ्रमण का मौका मिल सकेगा।

यह है नियम
वन विभाग की ओर से सत्र की शुरुआत में पर्यटन वाहनों के पंजीयन व नवीनीकरण के लिए जो टेण्डर फार्म जारी किया जाता है उसमें भी हर पारी के भ्रमण पर जाने वाले अंतिम पर्यटन वाहन को ही कम सीट में पार्क भ्रमण पर भेजने का उल्लेख किया गया है लेकिन वन अधिकारियों की उदासीनता केकारण प्रतिपारी कम से कम चार से पांच पर्यटनवाहन निर्धारित से कम सीट यानि पर्यटकों को लेकर पार्क पार्क भ्रमण पर जा रहे हैं।

इनका कहना है…
अंतिम समय पर बुकिंग निरस्त करने पर रिफंड का प्रावधान नहीं है। जहां तक गाइड व वाहन मालिक को दी जाने वाले राशि का सवाल है तो यह भी अब तक केवल भ्रमण पर जाने या पर्यटक द्वारा च्वाइस लागू करने पर ही दी जाती है।
– संदीप चौधरी, उपवन संरक्षक(पर्यटन), सवाईमाधोपुर।