
रणथम्भौर में विचरण करता बाघ। पत्रिका फाइल फोटो
सवाईमाधोपुर। रणथम्भौर को बाघों की नगरी और नर्सरी के नाम से भले ही जाना जाता हो, लेकिन वर्तमान में क्षमता से अधिक बाघों के कारण आपसी संघर्ष के मामले बढ़ते जा रहे हैं। करीब 50 बाघ की क्षमता वाले पार्क में वर्तमान में 75 से अधिक संख्या है।
वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इण्डिया की ओर से पूर्व में जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार रणथम्भौर को क्षेत्रफल और ग्रासलैण्ड के आधार पर पचास बाघ बाघिनों के लिए ही उपयुक्त माना गया था, हालांकि पिछले कुछ सालों में यहां ग्रासलैण्ड में वृद्धि हुई है। फिर भी विशेषज्ञों की मानें तो वर्तमान में यहां क्षमता से अधिक बाघ बाघिन विचरण कर रहे हैं। इलाके की तलाश में लगातार बाघ-बाघिन जंगल से बाहर भी आ रहे हैं।
रणथम्भौर बाघ परियोजना के उपवन संरक्षक मानस सिंह का कहना है कि वर्तमान में रणथम्भौर में क्षमता से अधिक बाघ बाघिन है। टाइगर शिफ्टिंग और टाइगर कॉरिडोर को विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 2008 से अब तक रणथम्भौर से कुल 24 बाघ बाघिनों को अन्यत्र शिफ्ट किया जा चुका है। इनमें से 13 बाघ-बाघिनों की मौत भी हो चुकी है। रणथम्भौर से सरिस्का अब तक 11 बाघ-बाघिन भेजे जा चुके हैं।
इनमें बाघ टी-1, टी-7, टी-12, टी-18, टी-44, टी-51, टी-52, टी-75 और टी-113 सहित अन्य टाइगर शामिल है. लेकिन सरकार की रणथंभौर से टाइगर शिफ्टिंग की योजना को उस वक्त बड़ा आघात लगा, जब सरिस्का भेजे गए 11 में से 5 बाघों की मौत हो गई।
वनाधिकारियों ने बताया कि रणथम्भौर में इंद्रगढ़, लाखेरी होते हुए कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व तक बाघों की आवाजाही रहती है। पूर्व में इस मार्ग से कई बाघ बाघिन रणथम्भौर से बूंदी के रामगढ़ विषधारी और कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व पहुंच चुके हैं, लेकिन बीच में हाइवे और रेलवे ट्रैक होने के कारण हादसे हो चुके हैं। पूर्व में रणथम्भौर में मुकुंदरा गया ब्रोकन टेल बाघ की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई थी।
इसी प्रकार रणथम्भौर के भिड़ नाके से करौली और धौलपुर तक टाइगर कॉरिडोर है। यहां से सुल्तान यानि टी-72 और तूफान यानि टी-80 रणथम्भौर से करौली पहुंच चुके हैं। लेकिन रास्ते में कई गांव होने के कारण खतरा बना रहता है। वहीं रणथम्भौर से चंबल को पार करके कई बार बाघ एमपी के कूनों तक भी पहुंचे है। ऐसे में इन क्षेत्रों को विकसित किया जाए तो बाघाें के विचरण के लिए स्वचछंद वातावरण मिलेगा। इससे उनका आबादी में मूवमेंट पूरी तरह रूक जाएगा।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जनवरी 2025 से मार्च 2026 तक बाघ के हमले में 15 माह में तीन मौत हो चुकी है। इनमें 16 अप्रैल 2025 को त्रिनेत्र गणेश मंदिर के पास एक 7 वर्षीय बच्चे पर बाघ हमला कर जंगल में ले गया। 11 मई 2025 को रेंजर देवेंद्र चौधरी पर हमला, गर्दन पर वार कर मौत के घाट उतारा। 09 जून 2025 को रणथम्भौर दुर्ग में जैन मंदिर के चौकीदार राधेश्याम माली पर हमला कर मार दिया।
Published on:
29 Mar 2026 12:21 pm
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