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पुरातन और विज्ञान: एलियन, यूएफओ व पौराणिक कथाएं

एक शोध में दावा किया गया है कि एलियन ने ऑक्टोपस से मिलते-जुलते इंसान सृजित कर लिए हैं। मिल्टन विलियम कूपर लिखित पुस्तक ‘यूएफओ ट्रूथर्स’ में इस बात का उल्लेख है।

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Sunil Sharma

Jul 05, 2021

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- प्रमोद भार्गव
लेखक एवं साहित्यकार, मिथकों को वैज्ञानिक नजरिए से देखने में दक्षता

आजकल दुनिया में अंतरिक्ष, उडऩ-तश्तरियों (यूएफओ) और एलियन की खूब चर्चा हो रही है। अनेक देश लंबे समय से इन पर शोध कर रहे हैं। इन पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं। अमरीकी मीडिया में तो आजकल एलियन और यूएफओ की खबरें छाई हुई हैं। एक शोध में दावा किया गया है कि एलियन ने ऑक्टोपस से मिलते-जुलते इंसान सृजित कर लिए हैं। मिल्टन विलियम कूपर लिखित पुस्तक ‘यूएफओ ट्रूथर्स’ में इस बात का उल्लेख है। शोधकर्ताओं का दावा है कि जिस न्यू मेक्सिको के डल्स बेस की सच्चाई को अमरीका छिपाता रहा है, वहां असल में एलियन का राज है। यहां एलियन नए-नए प्रयोग करते हैं। वर्ण-संकर प्राणियों को पिंजरे में रखा जाता है। इस स्थल पर आधे इंसान और आधी चिडिय़ा जैसे जीवों को इंसानों के डीएनए से पैदा करके शीतालयों में रखा जाता है। इन दावों में सच्चाई क्या है, यह तभी पता चलेगा जब यह स्थापित हो जाए कि वाकई एलियन का अस्तित्व है। मुश्किल यह है कि नवीन अनुसंधानों को गोपनीय रखा जाता है।

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भारतीय वैदिक देवता ही नहीं, दुनिया के सभी अंतरिक्षवासी देवताओं के साथ भी विचित्र व विविध रूप रंग होने की कथाएं जुड़ी हैं। क्या पृथ्वी के अतिरिक्त जो ग्रह हैं, वहां मनुष्य जैसे या मनुष्य से भी अधिक उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करने वाले प्राणी निवास करते होंगे? क्या वैदिक काल में यही यात्री अंतरिक्ष यानों से धरती पर आते रहे होंगे? पौराणिक कथाओं में इनको स्वान तारा-समूह में स्थित एक सुदुर ग्रह से आना बताया गया है। डॉ. कार्ल सागन और जोसेफ स्कलोवस्की की चर्चित पुस्तक है 'इंटेलिजेंट लाइफ इन द यूनिवर्स’।

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लेखकों का मानना है कि जिस काल में मानव होमोसेपियन्स बना था, उस कालखंड के इर्द-गिर्द पृथ्वी पर अन्य किसी ग्रह से अत्यंत सभ्य और प्रबुद्ध प्रजाति के प्राणी आए थे। इन लेखकों ने प्राचीन भारतीय सुमेर तथा अक्कद (वर्तमान बेबीलोन) की कला, संस्कृति और विज्ञान को अपनी विषय-वस्तु को आधार बनाया है। जैविक विकास की प्रक्रिया के अनुसार उन्हें विकसित व सभ्य होने में कई हजार वर्ष लगने थे, पर वे जिस तत्परता से सभ्य व विकसित हुए, विकास का वह क्रम आश्चर्यजनक है। फिलहाल सत्य क्या है, यह खोज का विषय है।