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युवा प्रतिभा: भारतीय मूल की छात्रा अनिका ने ढूंढा कोविड-19 का पुख्ता इलाज, बनीं टॉप यंग साइंटिस्ट

हाल ही अनिका चेबरोलू को कोरोना वायरस का संभावित इलाज खोजने के लिए उन्हें अमरीका के 'टॉप यंग साइंटिस्ट' अवॉर्ड से नवाजा गया है। इतना ही नहीं, उन्हें 25 हजार डॉॅलर की पुरस्कार राशि के साथ '2020 3एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज' प्रतियोगिता में 'इम्प्रूविंग लाइव्ज अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया गया।

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जयपुर

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Mohmad Imran

Nov 01, 2020

युवा प्रतिभा: भारतीय मूल की छात्रा अनिका ने ढूंढा कोविड-19 का पुख्ता इलाज, बनीं टॉप यंग साइंटिस्ट

युवा प्रतिभा: भारतीय मूल की छात्रा अनिका ने ढूंढा कोविड-19 का पुख्ता इलाज, बनीं टॉप यंग साइंटिस्ट

भारतीय मूल की 14 वर्षीय अमरीकी स्कूल छात्रा अनिका चेबरोलू के कोविड-19 वायरस (Covid-119 Virus) से मुकाबला करने के लिए एक नई एंटीवायरल दवा (Antiviral Medicine) विकसित करने वाले शोध (Research) के लिए अमरीका के 'टॉप यंग साइंटिस्ट' अवॉर्ड से नवाजा गया है। टेक्सास निवासी अनिका ने डिस्कवरी एजुकेशन की ओर से आयोजित '2020 3एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज' (2020 3M Young Scientist Challenge) प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। यह अमरीका के मिडिल स्कूल के छात्रों के लिए एक वार्षिक विज्ञान प्रतियोगिता है। अनिका ने इस प्रतियोगिता में न केवल पहला स्थान हासिल किया बल्कि उन्हें 'इम्प्रूविंग लाइव्ज अवॉर्ड' (Improving Lives Award) से भी सम्मानित किया गया है।

इसलिए मिला पहला स्थान
दरअसल, जिस कोरोना वायरस से आज पूरी दुनिया के वैज्ञानिक जूझ रहे हें उसे रोकने के लिए आठवीं ग्रेड की छात्रा अनिका ने कोरोना के लिए संभावित प्रभावी ड्रग की खोज करने के लिए इन-सिलिको (In-Silico) पद्धति का उपयोग किया। ताकि वे एक ऐसे अणु (मॉलीक्यूल) की खोज कर सकें जो सार्स-सीओवी-2 (sars-cov-2) के स्पाइक प्रोटीन (spike protien) को चुन-चुनकर निष्क्रिय कर सके। इस प्रमुख यौगिक को खोजने के उनके सराहनीय प्रयासों के लिए, जो कोरोनावायरस बीमारी के प्रभावी उपचार की एक कारगर दवा हो सकती है, अनिका को इस सम्मान से नवाजा गया है जिसके साथ उन्हें 25 हजार डॉॅलर की पुरस्कार राशि भी मिली है।

10 में से 7 फाइनलिस्ट भारतीय
इस प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर भी एक और भारतीय छात्र ओहियो निवासी 12 वर्षीय लास्य आचार्य थे। सातवीं ग्रेड के छात्र लास्य ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो किसानों को रोगग्रस्त और खराब फसलों का पता लगाने में सक्षम बनाएगी। इससे फसल की कटाई के दौरान खाद्य अपव्यय को कम किया जा सकेगा। हैरानी की बात यह रही कि इस साल के टॉप 10 फाइनलिस्ट्स में से 7 भारतीय मूल के ही छात्र-छात्राएं थे।