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वैज्ञानिकों ने बनाया ‘कैप्सूल कैमरा’ जो ढूंढेगा आंतों में कैंसर सेल

इंग्लैड की एक कंपनी ने 'कैमरा-इन-ए-पिल' नाम का एक खास मिनिएचर कैमरा डिवाइस बनाया है जिसे निगला जा सकता है। इसमें मौजूद कैमरा शरी के अंदर केंसर कोशिकाओं का पता लगाने में सक्षम है।

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जयपुर

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Mohmad Imran

Mar 16, 2021

वैज्ञानिकों ने बनाया 'कैप्सूल कैमरा' जो ढूंढेगा आंतों में कैंसर सेल

वैज्ञानिकों ने बनाया 'कैप्सूल कैमरा' जो ढूंढेगा आंतों में कैंसर सेल

चिकित्सा उपकरण बनाने वाली इंग्लैंड की एक कंपनी एनएचएस ने एक नया बहुत छोटा कैमरा उपकरण बनाया है जो कोलोनोस्कोपी (आंतों में कैंसर का पता लगाने की प्रक्रिया) का सटीक विकल्प बन सकता है। कंपनी ने अपने इस नए उपकरण के मानव शरीर पर परीक्षणों की शुरुआत भी कर दी है। 'कैमरा-इन-ए-पिल' नाम के इस खास मिनिएचर कैमरा डिवाइस को एक मरीज आसानी से निगल सकता है। निगलने के बाद यह कैमरा बड़ी आंत और रेक्टम (गुदा द्वार) में पहुंचकर बारीकी से यह जांचने के लिए डिजाइन किया गया है कि शरीर के इन दो हिस्सों में आंत्र कैंसर की कोशिकाएं तो नहीं हैं।

तस्वीरें भी रिकॉर्ड करेगा
कई लोगों के लिए, कोलोनोस्कोपी एक धीमी और शर्मनाक प्रक्रिया हो सकती है। लेकिन इंग्लैंड में मरीजों को अब एक कैप्सूल में कॉड लिवर ऑइल टैबलेट के आकार को निगलने से ही कोलोनोस्कोपी से राहत मिल जाएगी। इस प्रक्रिया में जहां आंत में कैमरा डालकर किसी प्रकार की गांठ, संक्रमित कोशिका या कैंसर सेल का पता लगाया जाता है। लेकिन एनएचएस कंपनी के बनाए 'पिलकैम' नामक कैप्सूल के अंदर लगा यह छोटा कैमरा 8.1 एमबीपीएस तक की डेटा दर के साथ तस्वीरें भी रिकॉर्ड करेगा जिसे बाद में बड़ी स्क्रीन पर आसानी से देखा सकेगा।

ऐसे काम करता है 'पिलकैम'
साधारण कैप्सूल की तरह इसे रोगी द्वारा निगला जाता है। जहां यह बड़ी आंत और उसके बाद रेक्टम तक का सफर तय करता है। इसके बाद खींची गई तस्वीरों को एक बाहरी रिकॉर्डर में भेजता है। यह रिकॉर्डर कमर के चारों ओर पहनी जाने वाली बेल्ट से जुड़ा होता है। इस प्रक्रिया के लिए अस्पताल जाने की भी जरुरत नहीं है और उपयोगकर्ता अपने शरीर में कैप्सूल होने पर अधिकांश दैनिक गतिविधियों को जारी रख सकते हैं। इतना ही नहीं, पिलकैम के साथ नियमित रूप से अन्य दवाइयां लेना जारी रखा जा सकता है।

पिलकैम बायोकम्पैटिबल प्लास्टिक से बना है। इस पूरी प्रक्रिया में पांच से आठ घंटे लगते हैं। तस्वीरों को कैप्सूल से रिकॉर्डर तक वायरलेस रूप से भेजा जाता है, फिर मूल्यांकन के लिए एक कैंसर विशेषज्ञ को दिया जाता है। शौचालय जाने पर मरीज कैप्सूल को बाहर निकाल देते हैं। इंग्लैंड में लगभग 40 क्षेत्रों में 11 हजार रोगियों को ये कैप्सूल कैमरे वितरित किए जाएंगे।