
नई दिल्ली। आज के समय में कौन सा ऐसा क्षेत्र है जहां महिलाएं काम नहीं करतीं। खासकर भारत में जहां महिलाओं को कई दशक पहले अच्छी गृहणी बनने की सीख घर-घर में दी जाती थी वहीं वे आज के समय में घर के कामों और नौकरी दोनों में अच्छा कर रही हैं, लेकिन कभी आपने सोचा कि भारत में किसने ये शुरुआत की। वर्तमान में जो महिलाओं की स्थिति है जो कद है उसकी शुरुआत कई महिलाओं ने की जिसमें से एक का ज़िक्र आज हम आपसे करने जा रहे हैं। डॉ कमल जयसिंह रणदिवे को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
कमल रणदिवे ने शुरुआती दौर में कैंसर पर कई शोध किए। वास्तव में, स्तन कैंसर की घटना और आनुवंशिकता के बीच संबंध का प्रस्ताव रखने वाली वह पहली शख्स थीं। इस बात की पुष्टि बाद में कई शोधकर्ताओं ने भी की। किस्मत से कमल का जन्म उस घर में हुआ जहां के पुरुष लड़कियों को पढ़ाने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होना गलत नहीं समझते थे। कमल के पिता दिनकर पुणे के फर्गसन कॉलेज में एक जीवविज्ञान के प्रोफेसर हुआ करते थे। उनका उद्देश्य था कि घर के सभी बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिले खासकर बेटियों को।
कमल अपने पिता की उमीदों पर एकदम खरी उतरीं। उन्होंने जीवन की हर परीक्षा अच्छे अंकों से पास की। कमल हमेशा कुछ नया सीखती और उसमें अच्छा कर के दिखतीं। इसी तरह बेटी का दिमाग देख उनके पिता चाहते थे कि कमल डॉक्टर बनें और उनकी शादी भी किसी डॉक्टर से ही हो, लेकिन कमल ने वो रास्ता नहीं चुना उन्होंने फर्गसन कॉलेज से वनस्पति विज्ञान और जूलॉजी में स्नातक की पढ़ाई की और भारत की पहली और अग्रणी महिला वैज्ञानिकों में से एक बनकर उभरीं। वह भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (IWSA) की प्रमुख संस्थापक सदस्य भी थीं।
Published on:
11 Oct 2019 02:49 pm
बड़ी खबरें
View Allविज्ञान और टेक्नोलॉजी
ट्रेंडिंग
