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अब चीन 15 करोड़ किमी दूर के सूर्य मिशन की तैयारी में

जय विज्ञान : सूर्य-पृथ्वी के जिस पॉइंट पर कोई नहीं पहुंचा, वहां भेजेगा यान, 2026 में झिहे-2 यान की लॉन्चिंग की संभावना

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अब चीन 15 करोड़ किमी दूर के सूर्य मिशन की तैयारी में

अब चीन 15 करोड़ किमी दूर के सूर्य मिशन की तैयारी में

बीजिंग. भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल-1 के बाद चीन पृथ्वी और सूर्य के बीच लाग्रैंज पॉइंट एल-5 के लिए सौर अन्वेषण मिशन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यह पॉइंट पृथ्वी से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। भारत का आदित्य यान लाग्रैंज पॉइंट एल-1 के लिए भेजा गया है, जो पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है। एल-5 पॉइंट तक पहुंचने वाला चीन का झिहे-2 दुनिया का पहला कृत्रिम प्रोब होगा। यह अंतरिक्ष अन्वेषण में मील का पत्थर साबित होगा।

सीजीटीएन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन का यह मिशन 2026 में लॉन्च किए जाने की संभावना है। इसका मकसद सौर सक्रिय इलाकों में चुंबकीय क्षेत्र की उत्पत्ति और विकास की जांच करना, सौर विस्फोट की त्रि-आयामी संरचना और भौतिक तंत्र का अध्ययन करना है। एल-5 पॉइंट अंतरिक्ष के मौसम के अध्ययन और सौर गतिविधियों की निगरानी के लिए आदर्श स्थान है। यहां सौर गतिविधि को पृथ्वी से तीन दिन पहले देखा जा सकता है। इसके अलावा पृथ्वी पर प्रभाव से चार-पांच दिन पहले सौर हवा को मापा जा सकता है।

अन्वेषण के लिए अब तक अछूता स्थान

झिहे-2 यान के डिजाइनरों में से एक नानजिंग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर फेंग चेंग का कहना है कि सूर्य-पृथ्वी के बीच एल-5 पॉइंट अन्वेषण के लिए अब तक अछूता स्थान है। वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्त्वपूर्ण डाटा हासिल करने के अलावा यान अंतरिक्ष के मौसम के पूर्वानुमान की चीन की क्षमता को बढ़ाएगा। इससे अंतरिक्ष संबंधी घटनाओं को लेकर सटीक भविष्यवाणियां हो सकती हैं।

अब तक सिर्फ पार्कर प्रोब सबसे करीब

अब तक सिर्फ नासा का पार्कर सोलर प्रोब सूर्य के सबसे करीब पहुंचा है। यह सूर्य की सतह से 69 लाख किलोमीटर दूर करीब चार साल से उसके चक्कर लगा रहा है। पृथ्वी से सूर्य की दूरी करीब 15.009 करोड़ किलोमीटर है। आइरिस (इंटरफेस रीजन इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ) के जरिए पार्कर सोलर प्रोब सूर्य के सतह की हाई रिजोल्यूशन तस्वीरें ले रहा है। नासा ने इसे 2018 में लॉन्च किया था।