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अब ‘साइबर वॉलंटियर’ के जरिए सोशल मीडिया पर नजर रखेगी सरकार

पहली बार प्रयोग- 'राष्ट्र विरोधी कंटेंट' पर लगाम के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम— जम्मू-कश्मीर और त्रिपुरा में पहले प्रोजेक्ट का ट्रायल शुरू।— गृह मंत्रालय का पायलट प्रोजेक्ट, कंटेंट का करेंगे विश्लेषण।

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अब 'साइबर वॉलंटियर' के जरिए सोशल मीडिया पर नजर रखेगी सरकार

अब 'साइबर वॉलंटियर' के जरिए सोशल मीडिया पर नजर रखेगी सरकार

नई दिल्ली। इंटरनेट पर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर तेजी से बढ़ रही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर लगाम के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय गृहमंत्रालय एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत साइबर वॉलंटियर की नियुक्ति करेगी जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से जुड़े कंटेंट, पोस्ट, ट्वीट की पहचान करेंगे। इसलिए इंटरनेट व सोशल मीडिया पर इस तरह की जानकारी व विडियो शेयर करने पर कड़ी कार्रवाई होगी।

तीन राज्यों में अभी ट्रायल -
इस पायलट प्रोजेक्ट को गृह मंत्रालय सबसे पहले ट्रायल के लिए जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा में शुरुआत करेगा। वहां के आंकड़ों का विश्लेषण कर केंद्र सरकार आगे की योजना को आकार देगी। इसके लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) को नोडल पॉइंट के रूप में प्रयोग किया जाएगा।

कैसे बनेंगे साइबर वॉलंटियर -
साइबर वॉलंटियर बनने के लिए कोई भी भारतीय नागरिक अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में पंजीकरण करवा सकता है। पंजीकरण के लिए नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर व ई-मेल आइडी व पते के प्रमाण के रूप में आधार, मतदाता पत्र देना होगा।

चार गतिविधियों पर नजर-
वॉलंटियर विशेष रूप से चार तरह की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। चाइल्ड पॉर्नोग्राफी, बलात्कार, आतंकवाद व राष्ट्र विरोधी गतिविधियां प्रमुख हैं। वॉलंटियर को यह अधिकार होगा कि वह व्यक्ति या कंटेंट को फ्लैग कर दें। सोशल मीडिया में फ्लैग का मतलब किसी को ब्लॉक करने के लिए अपनी राय देना होता है।

कानूनी ढांचा नहीं -
रिपोर्ट के अनुसार, अभी राष्ट्र विरोधी कंटेंट पर लगाम के लिए कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार नहीं हुआ है। अभी तक ऐसे मामलों में सरकार यूएपीए का प्रयोग करती है। यूएपीए के तहत राष्ट्र विरोधी गतिविधि में लिप्त व्यक्ति को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ कार्रवाई होती थी।

कैसे तय होगा कंटेंट राष्ट्र विरोधी-
कैसे यह निर्धारित होगा कि कौन सा राष्ट्र विरोधी कंटेंट और राष्ट्र विरोधी गतिविधि है? ऐसी गतिविधि में लिप्त सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई होगी।

वॉलंटियर के लिए सख्त नियम -
- साइबर वॉलंटियर अभियान का प्रयोग निजी हित, व्यावसायिक व सार्वजनिक फायदे के लिए नहीं कर सकते।
- साइबर वॉलंटियर सोशल मीडिया से लेकर किसी प्लेटफार्म पर गृह मंत्रालय के नाम का प्रयोग नहीं कर सकता है।
- वह अपनी किसी से पहचान गृह मंत्रालय से जुड़े होने के रूप में नहीं कर सकता है। उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई होगी।

बड़ा सवाल, कैसे तय होगी राष्ट्र विरोधी की परिभाषा-
हालांकि इस पूरी कवायद पर एक सवाल जरूर खड़ा हो रहा है कि क्या यह सरकारी निगरानी तंत्र है जो आम लोगों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखेगा। इसके साथ ही राष्ट्र विरोधी कंटेंट और व्यक्ति की परिभाषा क्या होगी? क्या सरकार के खिलाफ पोस्ट लिखना राष्ट्र विरोधी माना जाएगा या फिर कुछ और, हालांकि इस मुद्दे पर गृह मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिय है।