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Solar Storm: धरती की ओर 21.85 लाख किमी प्रति घंटे की गति से आ रहा सौर तूफान, जानिए कब होगी टक्कर

धरती की ओर से बड़ा सौर तूफान तेजी से बढ़ रहा है। इसको लेकर वैज्ञानिकों ने भी चिंता जाहिर की है। दरअसल ये तूफान 21.74 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार धरती की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह एक मध्यम दर्जे का सौर तूफान है. लेकिन यह धरती के चुंबकीय क्षेत्र को करीब 496 से 607 किलोमीटर प्रतिसेकेंड की गति से टकराएगा।

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Solar Storm Coming Towards The Earth At A Speed Of 21.85 lakh Km Per Hour

Solar Storm Coming Towards The Earth At A Speed Of 21.85 lakh Km Per Hour

धरती की ओर एक बड़ा खतरा तेजी से बढ़ रहा है। एक सौर तूफान ( Solar Storm ) धरती से टकराने वाला है। दरअसल कोलकाता स्थित द सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज के वैज्ञानिकों ने 28 मार्च 2022 को सूरज में भयानक विस्फोट देखे। इस सौर लहर की गति 21.85 लाख किलोमीटर प्रति घंटा है। यानी धरती से काफी ज्यादा ऊर्जा के तीव्र प्लाज्मा किरणों का टकराव होने वाला है। वैज्ञानिकों की मानें तो यह एक मध्यम दर्जे का सौर तूफान है. लेकिन यह धरती के चुंबकीय क्षेत्र को करीब 496 से 607 किलोमीटर प्रतिसेकेंड की गति से टकराएगा।


द सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज ( CESSI) कोलकाता के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च की सह-संस्था है। CESSI के वैज्ञानिकों ने 28 को ही दो खतरनाक स्पॉट देखे हैं। इन स्पॉट को वैज्ञानिकों ने नाम भी दिया है। इसके मुताबिक पहला स्पॉट AR 12975 और दूसरा स्पॉट AR12976 है।

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इस दिन धरती से टकराएगा

इस विस्फोट से निकलने वाली सौर लहर 31 मार्च 2022 को धरती से टकराएगी। माना जा रहा है कि इस सौर लहर की गति 21.85 लाख किलोमीटर प्रति घंटा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ये दोनों स्पॉट एक्टिव हैं और M/X क्लास के सौर लहर पैदा कर रहे हैं।

तीसरी लहर AR 12978 ज्यादा तेज है। Cessi के फिजिसिस्ट प्रो. दिव्येंदु नंदी के मुताबिक इस सौर तूफान से इंसानों को घबराने की जरूरत नहीं है।


2019 से सक्रिय हुआ ये तूफान

वैज्ञानिकों के मुताबिक वर्ष 2019 से ही ये सोलर साइकिल सक्रिय हो चुका है। अभी 11 सालों तक यह ऐसे ही सक्रिय रहेगा. इसकी तीव्रता 2025 में ज्यादा रहने की उम्मीद है।

रेडियो ब्लैकआउट होने की आशंका

बता दें कि इसी साल जनवरी के महीने में ऐसी ही घटना घटी थी। तब सौर तूफान ने दक्षिणी भारत समेत दक्षिणी गोलार्ध के कई इलाकों पर असर डाला था। इससे रेडियो ब्लैकआउट (Radio Blackout) होने की आशंका जताई जा रही है।


बताया जा रहा है कि, यह सौर तूफान सूरज के सक्रिय इलाके AR12929 से निकला था। यह इलाका सूरज और धरती की लाइन के ठीक सामने 71 डिग्री के कोण पर स्थित था। सौर तूफान को कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहते हैं।

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