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बेंगलूरु. खगोलीय पिंडों के अध्ययन के लिए स्थापित देश की पहली अंतरिक्ष खगोल वेधशाला एस्ट्रोसैट ने पृथ्वी की अपनी कक्षा में परिक्रमा करते हुए दो साल पूरे कर लिए हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इसे 28 सितम्बर 2015 को पीएसएलवी सी-30 से छोड़ा था। तब से अब तक यह साढ़े दस हजार से अधिक परिक्रमाएं कर चुका है और इस दौरान 360 से अधिक खगोलीय पिंडों का अध्ययन किया है।
एस्ट्रोसैट में ऐसे वैज्ञानिक पे-लोड हैं जो आकाशीय पिंडों को निकट और दूर पराबैंगनी (अल्ट्रावायलट) और दृश्य किरणों के अलावा कम और अधिक ऊर्जा वाली एक्स-रे तरंगों के जरिए एक साथ देख सकते हैं। इसकी दूरबीनों के जरिए ब्रह्मांड में एक विशेष तारापुंज के तारों की ऊर्जा अलग-अलग पासबैंड में मापी गई जिसके निष्कर्ष तारों के उद्भव और विकास के दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। लगभग 1515 किलोग्राम वजनी इस छोटे से उपग्रह को संपूर्ण वेधशाला कहा जाता है। इसे पृथ्वी से 650 किलोमीटर ऊपर विषुवतीय कक्षा में 8 डिग्री के झुकाव पर स्थापित किया गया है। एस्ट्रोसैट द्वारा किए आकाशीय पिंडों के अध्ययन के आधार पर 3 जनवरी 2017 तक 41 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके है।
3-डी प्रिंटेड मॉडल मिला मानव दिल की धड़कन का सूत्र
लंदन/सैन फ्रांसिसको। वैज्ञानिकों के एक दल ने त्रिआयामी प्रिंट किया गया दिल का मॉडल विकसित किया है, जिससे शल्य चिकित्सकों को उन विशेष कोशिकाओं की जानकारी मिली है, जो हमारे दिलों में धड़कन पैदा करती हैं। इसके अलावा यह मॉडल दिल की बीमारियों के इलाज के लिए भी अभूतपूर्व विस्तृत जानकारी मुहैया कराएगा, जिससे अनमोल ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना इलाज किया जा सकेगा।
इसकी मदद से दिल की प्रणाली में आई गड़बड़ी का अति सूक्ष्म स्तर पर निरीक्षण किया जा सकेगा और बेहतर इलाज किया जा सकेगा। यह हृदय से जुड़ी अन्य बीमारियों के इलाज में भी मददगार होगा, जैसे कि अनियमित धड़कन जो रक्त संचार में गड़बड़ी से जुड़ी होती है।
ब्रिटेन के लिवरपूल जॉन मूरेस यूनिवर्सिटी (एलजेएमयू) के प्रोफेसर जोनाथन जारविस का कहना है, 3-डी आंकड़ों से कार्डियक कंडक्शन प्रणाली की हृदय के बाकी हिस्से से जटिल संबंधों को समझने में आसानी होती है।
साइंटिफिक रिपोर्ट पत्रिका में प्रकाशित इस शोध-पत्र में जारविस ने लिखा है कि 3-डी प्रिंटेड मॉडल के आंकड़ों से हृदय रोग विशेषज्ञों, हृदय रोग से पीडि़त मरीजों के बीच बीमारी के बारे में चर्चा में भी मदद मिलती है।
कॉर्डियक कंडक्शन सिस्टम विद्युत तरंगों का निर्माण करती है और छोड़ती है, जो हृदय की मांसपेशियों को सिकुडऩे और फैलने के लिए उत्तेजित करती है और हृदय के विभिन्न भागों का विनियमन करती है, ताकि वे समन्वित ढंग से काम करें।
अगर इस प्रणाली में किसी प्रकार की खराबी आ जाती है और हृदय का एक हिस्सा बाकी हिस्से से तालमेल बिठाकर काम नहीं करता तो हृदय रक्त को कुशलता से पंप नहीं कर पाता और यह प्रक्रिया दिल के लिए हानिकारक होती है और उसकी कार्यप्रणाली को नुकसान होता है।
Published on:
27 Sept 2017 08:14 pm
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