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पहला रिसर्च वेसल सागर तारा हुआ लांच, टीटागढ़ वैगंस के नाम जुड़ी यह बड़ी उपलब्धि

वेसल भू-विज्ञान मंत्रालय की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी के लिए बनाया गया है।

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Neeraj Tiwari

Dec 26, 2018

research vessel

पहला रिसर्च वेसल सागर तारा हुआ लांच, टीटागढ़ वैगंस के नाम जुड़ी यह बड़ी उपलब्धि

नई दिल्ली। सरकार के 'मेक इन इंडिया' विजन के तहत टीटागढ़ समूह की कंपनी टीटागढ़ वैगंस लि. ने बुधवार को पहले कोस्टल रिसर्च वेसल (तटीय शोध जहाज) सागर तारा को सफलतापूर्वक लांच किया। बता दें कि यह यह वेसल भू-विज्ञान मंत्रालय की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी के लिए बनाया गया है। जटिल संरचना के बावजूद यह वेसल बुधवार को नियत समय से 3 माह पहले उतारा गया, जिससे वैज्ञानिक विभिन्न ओशेनोग्राफिक रिसर्च मिशनों पर काम कर सकेंगे।

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बता दें कि 'सागर तारा' में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं होंगी, जिनमें आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण होंगे। इसमें एक ड्रॉप कील है, जिसका डिजाइन और उत्पादन देश में पहली बार किया गया है। यह वेसल ऑटो पायलट और डीपी1 सक्षमता से सुसज्जित है। लांचिंग के मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, कि यह भारत के तटीय शोध के इतिहास में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। निजी क्षेत्र सरकार के साथ मिलकर 'मेक इन इंडिया' को गति दे रहा है।

इस मौके पर भू-विज्ञान मंत्रालय के सचिव, ईएसएसओ के अध्यक्ष और पृथ्वी आयोग के अध्यक्ष डॉ. माधवन नायर ने कहा, देश की तटीय और समुद्री शोध क्षमताओं को बढ़ाना हमेशा से सरकार की प्राथमिकता रही है। एनआईओटी के मालिकाना हक वाले इस नए वेसल से हमारी शोध क्षमता उन्नत होगी और देश तथा नागरिकों को बहुआयामी लाभ होगा।

टीटागढ़ वैगंस लि. के कार्यकारी अध्यक्ष जगदीश प्रसाद चौधरी ने कहा, टीटागढ़ में हमारे पास रिकॉर्ड समय में तीन जहाज लांच करने की अनूठी उपलब्धि है। एनआईओटी के लिए दो कोस्टल रिसर्च वेसल्स में से एक को लांच किया गया है, जो इंडियन मैरिटाइम और ओशेनिक स्टडी में शोध क्षमताओं को मजबूत करेगा। ये रिसर्च वेसल्स अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से निर्मित किए गए हैं और इनमें सबसे आधुनिक उपकरण हैं।