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क्या होता है Genetic Test, जानें किन हालात में इन्हें कराना है जरूरी ?

ब्रेस्ट एंड ओवेरियन कैंसर, मोटापा, पार्किंसस, सिस्टिक फाइब्रोसिस, सीलिएक डिसीज जैसी किसी भी जेनेटिक बीमारी होने पर genetic test कराएं ।
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Pragati Vajpai

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Updated: 4 Sep 2020, 12:28 PM IST

genetic test

genetic test

नई दिल्ली : एक नवजात बच्चा जब पैदा होता है तो उसमें दो तरह के जींस पाए जाते हैं एक माँ से और एक पिता से। दोनों जींस मिलकर बच्चे के नैन नक्श और उसकी पर्सनालिटी तय करते हैं। पर्सनॉल्टी और बाकी चीजों के अलावा बच्चा अपने माता-पिता से एक और चीज लेता है वो है जेनेटिक डिसऑर्डर । इन जेनेटिक डिसऑर्डर्स ( genetic disorders ) का पता लगाने के लिए आप जेनेटिक टेस्टिंग करा सकते हैं। इस टेस्ट के माध्यम से आपके होने वाले बच्चे को माता या पिता से कोई जेनेटिक डिसऑर्डर होगा उसका पता चल जाता है और आप जरूरी सावधानी ले सकते हैं। आइए जेनेटिक टेस्टिंग के बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या होती है Genetic Testing - Genetic Test में ब्लड सैंपल का एनालिसिस किया जाता है । अपने होने वाले बच्चे को जेनेटिक डिसऑर्डर से बचाने के लिए आप यह जांच करवा सकते हैं। इससे यह फ़ौरन पता लग जाता है कि माता या पिता में ऐसा कौन सा जीन मौजूद है जो बच्चे को भी जेनेटिक बीमारी दे सकता है।

जेनेटिक टेस्ट का फायदा नुकसान-

इस टेस्ट से हम अनुवांशिक बीमारी ( genetic disease ) का पता लगा सकते हैं और जांच के परिणाम से शुरूआती उपचार विकल्पों को चुन सकते हैं। लेकिन इस जांच से कई लोगों को पछतावा भी हो सकता है जब उन्हें यह पता चलता है कि उनके बच्चे को कोई जेनेटिक डिसऑर्डर ( Genetic disorder ) है। इसके अलावा इस जांच से परिवार के कई भेद भी खुल जाते हैं जिससे घर में तनाव का माहौल पैदा हो जाता है।

किन हालात में कराए जेनेटिक टेस्ट-

अगर ब्रेस्ट एंड ओवेरियन कैंसर, मोटापा, पार्किंसस, सिस्टिक फाइब्रोसिस, सीलिएक डिसीज जैसी किसी भी जेनेटिक बीमारी आपके या आपके पार्टनर के परिवार पीढ़ियों से चला आ रहा हो तो आप जेनेटिक टेस्टिंग करवा सकते हैं। ताकि आप अपने बच्चे को इस खतरे से बचा सकें।