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व्यायाम के तरीके से भी मूड पर पड़ता है असर दिमाग लेता है आनंद

यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड में शरीर संरचना विभाग की प्रोफेसर कार्सन स्मिथ कहती हैं कि एक्सरसाइज के दौरान मन के शांत होने का एक बड़ा कारण शरीर के तापमान में बढ़ोतरी होना है।

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व्यायाम के तरीके से भी मूड पर पड़ता है असर दिमाग लेता है आनंद

यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड में शरीर संरचना विभाग की प्रोफेसर कार्सन स्मिथ कहती हैं कि एक्सरसाइज के दौरान मन के शांत होने का एक बड़ा कारण शरीर के तापमान में बढ़ोतरी होना है। इससे मांसपेंशियों का तनाव कम होता है। व्यायाम करने के बाद तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियां आराम की मुद्रा में आ जाती हैं जो दिमाग को सूचना देती हैं जिसके बाद व्यक्ति अच्छा महसूस करता है।

एक्सरसाइज व्यक्ति खुद को फिट, एक्टिव, जवां रखने और मानसिक स्वास्थ्य के लिए करता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि व्यायाम से व्यक्ति में दो तरह की ऊर्जा का संचार होता है। पहला व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है, सतर्क रहने के साथ हमेशा खुश और उत्साहित रहता है। दूसरा ये कि व्यक्ति इससे शांत, संतुलित और संतुष्ट रहने के साथ आरामदायक मुद्रा में रहता है और दिमाग इसका पूरा आनंद लेता है। तो एक्सरसाइज शुरू करने से पहले जान लें मूड पर कैसे होता है असर।

सीढिय़ां चढऩा एक्सरसाइज नहीं
एरोबिक एक्सरसाइज करने से भी मूड पर असर पड़ता है। इससे केमिकल्स का स्त्राव अधिक होता है। वेटलिफ्टिंग या अन्य तरह के व्यायाम से ऐसा संभव नहीं है। हेडलबर्ग यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार घर का काम और सीढिय़ा चढऩा एक्सरसाइज नहीं है। बेहतर यही है कि थोड़ी देर योग, पुशअप, डिप्स या अन्य कुछ करें जिसे आप आसानी से क्षमता अनुसार कर सकते हैं। दस मिनट पैदल चलने से शरीर में रक्त का प्रवाह संतुलित रहता है। व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ और हंसमुख दिखता है। व्यायाम से शरीर में एंडोर्फिन हॉर्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। इससे व्यक्ति सकारात्मक सोच के साथ स्वस्थ और खुश रहता है।

दौडऩे से तंत्रिका तंत्र पर भी पड़ता है असर

दौडऩे का सही तरीका जानना जरूरी है। इससे हृदयगति और धडकऩ संतुलित रहती है। यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना की रिपोर्ट के अनुसार जो लोग 30 मिनट तक धीमी गति में दौड़ते हैं उनका तंत्रिका तंत्र संतुलित रहता है जबकि जो लोग तेज गति से दौड़ते हैं उसका तंत्रिका तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इसी लिए धावक पहले धीमी गति में दौड़ते हैं फिर रफ्तार बढ़ाते हैं।

टे्रडमिल पर दौडऩा उतना फायदेमंद नहीं

यूनिवर्सिटी ऑफ कंसास के ब्रेन रिसर्चर जेफरी बन्र्स मानते हैं कि ट्रेडमिल पर दौडऩे से उतना फायदा नहीं होता है जितना फायदा खुले वातावरण में दौडऩे से होता है। आठ से दस मिनट पार्क में बिताया जाए तो दिमाग में चलने वाली नकारात्मक हलचल को कम किया जा सकता है। सुबह के समय खेलने का मौका मिले तो नहीं चूकना चाहिए क्योंकि इससे शरीर को फुर्ती और ऊर्जा मिलती है।

व्यायाम करने का सही समय तय करें

व्यायाम करते हैं तो उसका सही समय तय करना होगा। सही समय पर व्यायाम किया जाए तो व्यक्ति भावनात्मक रूप से काफी राहत महसूस करता है। शाम के समय भी एक्सरसाइज से शरीर पर बेहतर प्रभाव पड़ता है। व्यायाम का जो भी समय तय करें उसी समय नियमित एक्सरसाइज करनी चाहिए इससे शरीर और मन दोनों को संतुलित ऊर्जा और शांति मिलती है। सुबह के समय व्यायाम करना सबसे सही समय है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ऐसा करने वाले व्यक्ति अपने दिनभर के काम को बेहतर ढंग से करते हैं। तनाव में रहने वाले लोगों को इससे अधिक फायदा होता है।

वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत