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सीहोर से बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता तक सप्लाई कर रहे केंचुआ खाद

खेती में नवाचार कर किसानों के लिए प्रेरणा बने रिटायर एपीओ, 600 रुपए क्विंटल में बेच रहे जैविक खाद

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सीहोर से बेंगलुरु, चेन्नई और कोतकाता तक सप्लाई कर रहे केंचुआ खाद

सीहोर से बेंगलुरु, चेन्नई और कोतकाता तक सप्लाई कर रहे केंचुआ खाद

सीहोर. कहते हैं जमीन से जुड़ा व्यक्ति हमेशा जमीन के बारे में ही सोचता है। ऐसे ही हैं चाणक्यपुरी निवासी 64 वर्षीय रिटायर सहायक परियोजना अधिकारी (एपीओ) गणेश शंकर चौहान। जवानी से ही खेती करने का सपना पाले हुए थे, लेकिन अच्छी खासी पढ़ाई की तो जिला पंचायत में अफसर बन गए। मध्यप्रदेश सरकार में एपीओ की नौकरी मिलने के चलते खेती का सपना पूरा नहीं कर पाए तो पहले जवानी के दिन में शान से बेदाग नौकरी की और जब रिटायर हो गए तो अपनी जवानी का सपना पूरा करने खेती में नवाचार शुरू कर दिए।

रिटायर एपीओ गणेश शंकर चौहान की इंदौर-भोपाल स्टेट हाइवे पर लसूडिया परिहार गांव के पास 14 एकड़ जमीन है। जमीन में जैविक खेती कर यह कई ऐसे नवाचार कर रहे हैं कि किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। गणेश शंकर चौहान किसानों से 1500 से 2000 रुपए में एक ट्रॉली गोबर खरीदते हैं और उससे अपने फार्म हाउस पर कैंचुआ खाद बनाकर 600 रुपए प्रति क्विंटल में सीहोर से बैंगलोर, मद्रास और कोतकाता सप्लाई करते हैं। ये हर महीने करीब 15 से 17 क्विंटल जैविक खाद बेच रहे हैं। जैविक खाद एक किलो, दो किलो और पांच किलो के पैकेट में सप्लाई की जा रही है। शहर की अधिकांश नर्सरी इन्हीं के फार्म हाउस से जैविक खाद खरीदते हैं।

रिटायरमेंट के दो साल पहले से ही बढ़ाई रूचि
जिला पंचायत से अप्रेल 2016 में रिटायर होने वाले चौहान बताते हैं कि रिटायरमेंट के दो साल पहले से ही खेती में ध्यान देना शुरू कर दिया था। पहले कुछ ज्यादा मेहनत की, लेकिन बाद में काम रूटीन में आ गया। अब जैविक खाद बनाने गोबर आसानी से मिल जाता है और जैविक खाद की सप्लाई भी हो जाती है। उन्होंने बताया कि जैविक खाद के लिए सबसे पहले दो-दो फीट ऊंचे 30 वाय 2.5 फीट के 9 सीमेंट की टंकी बनाईं। इसके बाद 300 रुपए प्रति किलो में 5 किलो कैंचुए लिए और जैविक खाद बनाने का काम शुरू कर दिया। अब 300 किलो तो कैंचुए बेच चुके।

चार एकड़ में की है तुलसी की बोवनी
रिटायर एपीओ ने बताया कि वे 14 एकड़ जमीन में बीते चार साल से जैविक पद्धति से गेहूं, चना और सोयाबीन की खेती कर रहे हैं, लेकिन कुछ जमीन में इस बार नवाचार किया है। उन्होंने बताया कि एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के संपर्क करने पर उन्होंने तुलसी, तिल्ली और अजवाइनक की बोवनी की है। चार एकड़ में तुलसी की बोवनी की है। तुलसी का बीज 350 रुपए प्रति किलो के हिसाब से अंतरराष्ट्रीय कंपनी ने उपलब्ध कराया है और तुलसी की फसल पैदा होने पर खरीदारी भी कंपनी के द्वारा ही की जाएगी।