सीहोर. तीन जनवरी की बात है। कलेक्टर के हुक्म की तामील में कुछ अफसर और पटवारियोंं ने तहसील परिसर में तीन फीट का बैनर लगाकर नैकी का पेड़ लगाया। नैकी का पेड़ लगाते समय अफसरों ने भी यह नहीं सोचा था कि इसकी शाखाएं इतनी फैल जाएंगी कि भूखे को रोटी, बीमार को खून और किसी बेबस को नौकरी देने तक की पहल यहां से हो जाएगी, लेकिन ऐसा हुआ है। शुक्रवार को नैकी के पेड़ ने वर्तन साफ करने वाली एक महिला को दो हजार रुपए महीने की नौकरी दी है।
जानकारी के अनुसार कोली मोहल्ला निवासी प्रिया शाक्य परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने और सिर पर दो बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी के चलते दो घरों में वर्तन साफ करने का काम करती हैं। प्रिया ने बताया कि दो घर में काम करने से उसे 700 रुपए महीना मिलता है, जिससे वह घर चलाती है। एमकॉम, पीजीडीएस की डिग्री कर चुकी प्रिया शुक्रवार को ठंड से बचने के लिए कुछ गर्म कपड़े लेने तहसील परिसर में लगे नेकी के पेड़ पर पहुंची। नेकी के पेड़ से प्रिया शाक्य अपने और बच्चों के साइज के कपड़े पसंद कर ही रहीं थीं, तभी एक नेकी के दाता परमानंद राय कपड़े दान करने पहुंच गए। परमानंद राय की प्रिया से बातचीत हुई तो बात ही बात में प्रिया ने अपनी पढ़ाई लिखाई का हवाला देते हुए अपनी आर्थिक स्थिति का दुखड़ा सुना दिया। प्रिया की आंख भी नम हो गईं। परमानंद राय ने तत्काल प्रिया की पीड़ा से एसडीएम राजकुमार खत्री को अवगत कराया।
नेकी के दाताओं का लेखा-जोखा रखेगी प्रिया
एसडीएम ने पटवारी संजय राठौर को भेजकर प्रिया को अपने चेंबर में बुलाया और नेकी के पेड़ का मैनेजमेंट संभाल रही समिति ने तय किया कि शनिवार से प्रिया दो हजार रुपए महीने में नौकरी करेंगी। प्रिया नेकी के पेड़ पर दान देने वाले नेकी के दाताओं का लेखा-जोखा रजिस्टर में दर्ज करने के लिए टेबल-कुर्सी डालकर नेकी के पेड़ के नीचे बैठेंगी।