
मौसम में लगातार आ रहे बदलावों के कारण अब हर मौसम में किसानों को फसलों को लेकर चिंता सताने लगी है। इन दिनों मौसम रबी की फसल का है। लेकिन मौसम की मार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम के असर से रबी सीजन की फसलों पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल जिले के कई गांवों में रबी की फसल गेहूं पर जड़ माहू का असर नजर आ रहा है। वहीं फसलों का जायजा लेने पहुंचे कृषि वैज्ञानिकों ने फिलहाल किसानों को सामयिक सलाह जरूर दी है।
जानें क्या है जड़ माहू, कैसे कर जाता है फसल को चट दरअसल जड़ माहू फसलों में होने वाला एक खतरनाक रोग है। यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो यह नहीं किया गया, तो इस रोग के कीट गेहूं की फसल को पूरी तरह से तबाह कर सकते हैं। जड़ माहू रोग के कीट गेहूं के पौधे की जड़ में चिपका रहता है। जहां से यह पौधे के पोषक तत्वों को लगातार चूसता है और फिर उन्हें कमजोर करके सुखा देता है। ऐसे किया जाता है निरीक्षण जड़ माहू से प्रभावित खेतों में पौधे को उखाड़कर ध्यान से देखा जाए, तो उसमें बारीक-बारीक हल्के पीले, भूरे या काले रंग के कीट चिपके हुए नजर आते हैं। मौसम में उच्च आद्र्रता और उच्च तापमान होने पर ये कीट ज्यादा तेजी से पनपते और फैलते जाते हैं। अनुकूल परिस्थितियां होने पर ये कीट पूरी फसल को ही नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि इन दिनों जिले भर के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आ रही है। समय रहते यदि इस रोग की रोकथाम के उपाय नहीं किए गए, तो फसल तबाह हो सकती है।
कृषि वैज्ञानिकों ने लिया जायजा
जिले भर में रबी सीजन की फसल गेहूं पर जड़ माहू का प्रकोप बढ़ता दिखने की सूचना मिलते ही कृषि विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। इसी के मद्देनजर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने जिले के इछावर विकासखंड के ग्राम सेवनिया, खेरी, निपानिया में गेहूं फसल का निदानिक भ्रमण किया। उन्होंने खेत में जाकर वस्तुस्थिति देखी और किसानों को फसलों को जड़ माहूं रोग से बचाने के लिए सलाह भी दी।
कृषि वैज्ञानिक बोले बुवाई से पहले कर लें ये काम
कृषि विज्ञान केंद्र, सेवनिया के कृषि विज्ञानी धर्मेंद्र पटेल का कहना है कि जिन क्षेत्रों में अभी तक गेहूं फसल की बुवाई नहीं की गई है, वहां पर बुवाई से पहले ही इमिडाक्लोप्रिड 48 प्रतिशत, एफएस की 01 मिली दवा अथवा थायोमेथोक्जाम 30 प्रतिशत, एफएस दवा की 1.5 मिली मात्रा प्रति किलोग्राम की दर से बीज उपचार अवश्य करें।
बुवाई कर चुके किसानों को भी दी सलाह
जिन क्षेत्रों में बुवाई का काम पूरा हो चुका है, तथा वहां जड़ माहू रोग के कीट पनप रहे हैं और प्रारंभ्कि अवस्था में हैं, तो वहां किसान भाई इमिडा क्लोरो पेड़ 17.8 एसएल की 80-100 मिली मात्रा अथवा थायोमेथाक्साम 25 प्रतिशत डब्लूपीकी 80 ग्राम मात्रा अथवा एसिटामिप्रिड 20 प्रतिशत एसपी दवा की 60 ग्राम मात्रा प्रति एकड़, 150-200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें या किसान थायोमेथोक्जाम 30 प्रतिशत कीटनाशक की 250 मिली मात्रा को 50 किलो यूरिया खाद में मिलाकर खेतों में प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
Updated on:
19 Nov 2023 09:59 am
Published on:
19 Nov 2023 09:58 am

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