
सरकारी स्कूल
सीहोर। नवीन शिक्षा सत्र new education session 2019-20 का आगाज होने के बाद भी जिले के सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों Government primary and middle schools में लापरवाही negligence के ढर्रे में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसमें शिक्षक नहीं no teacher मिल रहे तो कहीं नाममात्र के बच्चे children पढ़ाई करने पहुंच रहे हैं। पुरानी समस्या का निराकरण नहीं होने से जितने बच्चे आ रहे हैं वह भी परेशानी उठा facing problems रहे हैैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगे क्या स्थिति होगी।
शिक्षक नहीं मिले स्कूलों में
तेज गर्मी को देखते हुए इस बार 15 जून को शुरू होने वाले शिक्षा सत्र का श्रीगणेश 24 जून को हुआ था। शिक्षा सत्र के चौथे दिन गुरुवार को पत्रिका टीम ने तीन सरकारी स्कूलों का निरीक्षण कर हाल जाना तो चौकाने वाला मिला। स्कूल में कम बच्चे मिले तो कहीं शिक्षकों के इधर उधर जाने से वह मौके पर नहीं थे।
बच्चों को दिक्कत भी उठानी पड़ी
शिक्षक कम होने से जितने बच्चे स्कूल आएं थे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। वहीं दूसरी तरफ शिक्षा विभाग की अनदेखी से पुरानी समस्या का कोई सुधार नहीं होने से बच्चों को दिक्कत भी उठाना पड़ रही है। उल्लेखनीय है कि शासन हर साल सरकारी स्कूलों में व्यवस्था सुधारने लाखों रुपए खर्च करता है।
टीम को कौन से स्कूलों में क्या मिली स्थिति-
केस 01:- टॉयलेट, पानी के नहीं इंतजाम
सीहोर के वार्ड क्रमांक 29 दशहरावाला बाग के प्राथमिक स्कूल में 35 बच्चों में से 19 दर्ज मिले। स्कूल के बारे में पता चला कि स्वयं का भवन ही नहीं है। शासकीय स्कूल 400 रुपए प्रति महीने में किराए के भवन में चल रहा है और वह भी जर्जर है। सुविधा के नाम पर पानी, टॉयलेट जैसे कोई इंतजाम नहीं है। स्कूल के प्राधानाध्यापक केपी नायक ने बताया कि प्यास लगने पर बच्चों को स्कूल से कुछ दूर स्थित हैंडपंप या फिर अन्य जगह पानी पीने जाना पड़ता है।
केस02:- 8 में से एक शिक्षक ड्यूटी करते मिली
जिला मुख्यालय से दो किमी दूर स्थित मुगीसपुर के शासकीय प्राथमिक स्कूल में तो और भी हालात खराब मिले। कहने को तो स्कूल में 200 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन 50 ही उपस्थित थे। इसी तरह से 8 शिक्षक में से नाममात्र की एक शिक्षक ही मौजूद थी। उपस्थित शिक्षिका ने बताया कि कुछ की ड्यूटी परीक्षा और कुछ अवकाश पर होने से नहीं है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती मिली। शिक्षिक उमा शाक्य ने बताया कि जितने बच्चे आएं उनको वह पढ़ा रही है।
केस03:- बिजली, पंखे नहीं कॉपी से हवा करते मिले बच्चे
चौपाल सागर से 500 फीट दूर रफीकगंज के प्राथमिक स्कूल में 25 में से 22 बच्चे उपस्थित थे। स्कूल में बिजली, पंखे के कोई इंतजाम नहीं होने से बच्चे गर्मी और उमस के कारण स्कूल के अंदर ही बैठकर तप रहे थे। कई बच्चे गर्मी से निजात पाने किताब, कॉपी से ही हवा करने लगे लेकिन राहत नहीं मिली। स्कूल में एक महिला और एक पुरूष शिक्षक है। जिन्होंने बताया कि स्कूल में बिजली लंबें समय से नहीं है। जिससे बच्चों को दिक्कत उठाना पड़ रही है।
यह हैं स्कूलों में अभी प्रमुख समस्या
- जिले के कई स्कूल में शिक्षक कम तो कहीं है ही नहीं।
- कई स्कूल के पास स्वयं का भवन नहीं होने से किराएं में लग रहे।
- कई स्कूल में टॉयलेट, पानी के इंतजाम नहीं है।
- कई स्कूल के आसपास बाऊंड्रीवाल नहीं है।
- कई प्राइमरी व मिडिल स्कूल में बिजली तक नहीं।
फैक्ट फाइल
जिले में प्राइमरी व मिडिल स्कूल- 2025
प्राइमरी- 1350
मिडिल- 675
दर्ज बच्चे- एक लाख 10 हजार
कुल शिक्षक- 5 हजार 800
निर्देश दिए जाएंगे
बच्चों को अधिक संख्या में स्कूल तक लाने शिक्षकों को निर्देशित किया गया है। अभी गर्मी होने से भी बच्चे कम आ रहे है। जुलाई से जरूर उपस्थिति बढ़ जाएगी। फिर भी स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा, यदि इस तरह की स्थिति मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
अनिल श्रीवास्तव, डीपीसी सीहोर
Published on:
28 Jun 2019 03:14 pm
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