
सडक़ों पर दौडऩे वाले वाहन छोड़ रहे जहरीला धुआं
सडक़ों को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए नेशनल इन्फॉर्मेशन सेंटर (एनआईसी) के वाहन पोर्टल पर हरित सेवा (ग्रीन सर्विस) शुरू की है। इसके माध्यम से वाहनों के रेट्रोफिटमेंट कराए जाने वाली सीएनजी किट के प्रमाणित होने की पुष्टि रहती है। वाहन पोर्टल का संचालन परिवहन विभाग द्वारा किया जा रहा है। राज्य में वाहनों से उत्सर्जित होने वाली हानिकारक गैसों पर नियंत्रण के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है।
प्रदेश में समस्त वाहन प्रदूषण जांच केन्द्रों को एनआईसी के पीयूसीसी पोर्टल के साथ इंटीग्रेट किया जाकर पारदर्शी रूप से ऑनलाइन प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र जारी किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। ऑनलाइन पीयूसीसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट) जारी होने से उनका डेटा वाहन पोर्टल पर प्रदर्शित होने लगा है। इस सुविधा से चेकिंग अधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र मांगे जाने पर वाहन स्वामी द्वारा ऑनलाइन अथवा इलेक्ट्रॉनिक रूप में दिखाया जा सकता है, सीहोर जिले में करीब 12 स्थान पर पीयूसीसी जारी की जा रही हैं, वाहन चालक पीयूसीसी लेकर ही वाहनों का उपयोग करें, जिससे प्रदूषण को रोका जा सके।
वाहनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग द्वारा वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगाने का कार्य वाहन डीलर के माध्यम से किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक करीब 7 लाख पुराने रजिस्टर्ड वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगवाई जा चुकी है। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगने से वाहन चोरी की दशा में इसे ट्रेस किया जाना सरल हो जाता है।
सडक़ सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अनफिट वाहनों के संचालन पर प्रभावी रोक लगाए के प्रयास परिवहन विभाग द्वारा किए जा रहे हैं। जिले में भी निरंतर चैकिंग हो रही है। केन्द्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वाहनों के स्वचलित परीक्षण (ऑटोमेटेड टेस्टिंग) के बाद ही फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी किया जाना अनिवार्य किया गया है। वाहनों की मानव हस्तक्षेप रहित पारदर्शी तरीके से फिटनेस जांच करने के लिए ग्वालियर, इंदौर और भोपाल जैसे महानगर में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) क्रियाशील हो गए हैं। इसी के साथ प्रदेश के 22 जिलों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन बनाए जाने के लिए प्राथमिक पंजीयन प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं, जिसमें सीहोर भी शामिल है। इसके अलवा प्रतिवर्ष होने वाली औसतन 50 हजार सडक़ दुर्घटनाओं में 78 प्रतिशत सडक़ दुर्घटना वाहन चालक की गलती के कारण होती है। सडक़ दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से वाहन चालकों को प्रशिक्षण देने के लिए 3 स्तर प्रादेशिक, संभागीय और जिला स्तर पर प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना करने का निर्णय लिया गया है।
Published on:
05 Mar 2025 06:16 pm
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