
श्रीराम कथा
सीहोर.
पर्यावरण रहेगा तो ही हम जीवित रह सकेंगे। इसके बिना हमारे जीवन की कल्पना करना मुश्किल है। इस बात पर सभी अच्छी तरह से गौर कर पर्यावरण संरक्षण पर ज्यादा से ज्यादा जोर दे। वहीं किसी भी तरह के नशा करने से बचे। नशा नाश की जड़ होता है जो हमारे साथ परिवार को उजाड़ देता है।
कुछ इस तरह का संदेश चेतना साइकिल यात्रा के माध्यम से दिया गया। दरअसल अखिल भारतीय ब्राह्राम्ण महासभा के तत्वाधान में जितेंद्र शर्मा यह यात्रा निकाल रहे हैं। यह 70 किमी की यात्रा कर गुरुवार को सीहोर पहुंची। यहां सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त भारत, बेटी बचाओ बेटी पढ़ओ, नशा मुक्त भारत के बारे में लोगों को जागरूक किया गया। जिला संयोजक ऋतुरात तिवारी ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य आमजन को जागरूक करना है। इस अवसर पर राधेश्याम शास्त्री, मनोहर शर्मा, सुरेश नागर, पंडित राकेश शर्मा, रवि शर्मा, दीपक त्यागी आदि उपस्थित थे।
घायल बाघिन को तलाशने लगाएं कैमरे में पांच अन्य बाघ की मूवमेंट आई सीहोर.सीहोर-भोपाल सीमा के जंगल में घूम रही घायल बाघिन को तलाशने पांचवे दिन भी वन विभाग के अमले ने सर्चिंग की। सर्चिंग में तो अमले को कुछ पता नहीं चला, लेकिन निगरानी करने लगाएं सीसीटीवी कैमरों में जरूर पांच अन्य बाघों की मूमेंट नजर आई। जिसमें बाघिन कहीं पर नहीं दिख रही है। घायल बाघिन के वीरपुर रेंज में आने की जानकारी लगने के बाद से ही वन विभाग की नींद उड़ी है। विभाग ने पहले सेवनिया परिहार क्षेत्र में 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए थे, जब इनसे काम नहीं चला तो रातापानी से 10 कैमरे और बुलाए गए। जिनको चारमंडली, वीरपुर, सेवनिया परिहार, कठौतिया, चिकलपानी, लाखाखेड़ी में लगाया गया है। वीरपुर रेंज के रेंजर एसएन खरे ने बताया कि गुरुवार को भी वन अमले ने जंगल में सर्चिंग कर बाघिन के पदचिन्ह देखे, लेकिन कोई पता नहीं चला है। सीसीटीवी कैमरे में जरूर पांच अन्य बाघ की मूवमेंट नजर आई है। बाघिन को तलाशने दो हथनियों को भी बुलाया गया। जिसके साथ पांच महावत हैं। रेंजर खरे का कहना है कि जब तक घायल बाघिन की लोकेशन ट्रेस नहीं होती, तब तक हथनियों से सर्चिंग करना संभव नहीं है। यही कारण है कि अभी वन अमला पैदल ही पदमार्ग का पता लगा रहा है।
Published on:
27 Dec 2019 01:14 pm
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