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यह हैं सहवाग की सुपर वुमन: सीखने की ललक ने नहीं होने दिया बूढ़ा

सीखने की ललक हो तो नहीं होता इंसान बूढ़ा, सीहोर की महिला बन रही इस बात की मिसाल

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सीहोर

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Sunil Sharma

Jun 13, 2018

Motivational Story of Sehore's Lady laxmi bai

मजबूत इरादे हो तो इंसान नहीं होता बूढ़ा, ये रहा सबूत!

सीहोर। कहते है सीखने की कोई उम्र नहीं होती और इंसान तब तक बूढ़ा नहीं होता, जब तक उसमें सीखने की ललक खत्म नहीं होती। क्योंकि सीखने की प्रवृत्ति इंसान को लंबे समय तक युवा बनाएं रखती है। अगर आपके अंदर सीखने और मेहनत करने की क्षमता है तो कोई भी आपका रास्ता नहीं रोक सकता। सीहोर की एक महिला भी जिसकी उम्र 72 साल है। वह इस उम्र में भी कई युवा लोगों को मात दे रही हैं। टाइप राइटर पर टाइप करते हुए उनका वीडियों लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल वह टाईप राइटर पर इस तरह टाइप करने की उनकी स्पीड शताब्दी से कम नहीं है। उनका यह वीडियों देखकर वीरेंद्र सहवाग भी उनके फैन हो गए। क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने उस महिलस की तारीफ करते हुए ट्वीटर पर ट्विट किया। उन्होनें बताया कि यह महिला सुपरवुमेन है। हमें इनसे सीखना चाहिए।

आपको बता दें कि सीहोर के कलेक्ट्रेट में काम करनी वाली 72 वर्षीय महिला जिसका नाम लक्ष्मी बाई है। वह अपनी टाइपिंग स्पीड के कारण चर्चा में है। जब वे टाइप राईटर पर काम करती है, तो देखने वाले लोग उन्हें देखकर हैरान रह जाते है। उनकी अंगुलियां टाइप राईटर पर इस तरह चलती है जैसे शताब्दी एक्सप्रेस। वे 2008 से कलेक्ट्रेट में कई शिकायतों और दस्तावेजों को टाइप करती हैं। इन शिकायतों को टाइप करने पर, उनसे मिलने वाली राशि से अपना व अपने परिवार का पेट पालती हैं।

उनके परिवार में एक बेटी है, जो दिव्यांग है। लक्ष्मी बाई अपने साथ साथ अपनी बेटी का भी पूरा ख्याल रखती हैं। उसी के लिए वे दिन रात संघर्ष करती हैं। दरअसल, लक्ष्मी बाई का जीवन बहुत ही परेशानी वाला रहा है। उन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया। उनके संघर्ष की कहानी उनके शादी के समय से शुरू हुई। पति से कलह होने के चलते, उनके रिश्ते में दरार आ गई। लक्ष्मी बाई के जीवन का असली संघर्ष वहीं से शुरू हुआ।

इंदौर के एक सहकारी बाजार में पेकिंग का काम करते हुए लक्ष्मी बाई ने टाइपिंग कब सीख ली उन्हें नहीं पता। कुछ कारणों के चलते वह सहकारी पेकिंग कंपनी बंद हो गई और लक्ष्मी बाई अपने रिश्तेदारों के पास सीहोर आ गई। उस समय कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और एसडीएम भावना बिलम्बे ने 2008 में लक्ष्मी बाई की टाइपिंग स्पीड देखकर, कलेक्टर आॅफिस में जॉब दिलाई। तब से आज अब तक वे वहां नौकरी कर अपने परिवार का पेट पाल रही है। साथ ही लोगों के लिए एक उदाहरण पेश कर, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।

लक्ष्मी बाई के इस हुनर से कोई आम इंसान ही नहीं बल्कि टीम इंडिया के क्रिकेटर रह चुके वीरेंद्र सहवाग भी उनके हुनर के मुरीद हो गए। लक्ष्मी बाई का टाइपिंग वीडियों शेयर करते हुए सहवाग ने लिखा कि— "मेरे लिए यह सुपरवुमेन हैं. युवाओं को इन अम्मा से बहुत कुछ सीखना चाहिए. यह हमें बताता है कि कोई काम छोटा नहीं होता और सीखने या काम करने की कोई उम्र नहीं होती. प्रणाम! "